
सागवाड़ा @ पत्रिका. आस्था, प्रकृति और साधना का अपूर्व संगम श्रावण मास वागड़ में 13 अगस्त से प्रारंभ होगा। इस दौरान गांव, शहर और वनों में स्थित शिवालयों में बम बम भोले की गूंज सुनाई देगी। धर्मेश पंडया टामटिया ने बताया कि हिंदू पंचांग का पांचवां महीना श्रावण केवल तिथियों का फेर नहीं, बल्कि प्रकृति, स्वास्थ्य और अध्यात्मिकता के अपूर्व सामंजस्य का प्रतीक है। पंचांग के अनुसार, राजस्थान के दक्षिणांचल वागड़, गुजरात और महाराष्ट्र में अमांत पंचांग का पालन होता है। इसके अनुसार, श्रावण मास 13 अगस्त श्रावण शुक्ल प्रतिपदा से प्रारंभ होकर 11 सितंबर भाद्रपद अमावस्या तक रहेगा। वहीं उत्तर भारत, मेवाड़-मारवाड़ में पूर्णिमांत पंचांग मान्य है, जहां श्रावण मास 30 जुलाई से प्रारंभ हो चुका है और 28 अगस्त तक रहेगा। इस श्रावण मास में चार सोमवार आएंगे। इन दिनों सोमवार और प्रदोष का विशेष पूजन-अर्चन किया जाएगा। शिवभक्त चावल, तिल, मूंग, जौ, सत्तू से शिवलिंग की पूजा तथा जल, दूध, शहद, ईख के रस से अभिषेक करेंगे। वागड़ क्षेत्र शिव आस्था का केंद्र है। यहां के प्रसिद्ध स्वयंम्भू शिवालयों में नया महादेव, भुवनेश्वर महादेव करौली, बेणेश्वर, नीलकंठ महादेव वान्दरवेड़, गोरेश्वर महादेव दिवड़ा बड़ा, जेथोलेश्वर महादेव ओड़, मृत्युश्वर महादेव सागवाड़ा, नर्मदेश्वर महादेव खडग़दा, दुधेश्वर महादेव हडमाला, क्षीरेश्वर महादेव अंबाडा, नीलकंठ महादेव देवला, कटकेश्वर महादेव कतिसौर शामिल हैं। शिव पुराण एवं सनातन परंपरा में श्रावण मास की महिमा बताते हुए कहा गया है कि इस मास में निश्छल भाव से भगवान शिव की पूजा करने से सभी सात्विक इच्छाएं पूर्ण होती हैं। उपवास और सात्विक आहार से मन, वचन और कर्म शुद्ध होते हैं। यह महीना क्रोध, लोभ, मोह जैसे विकारों को त्यागने का अवसर है। श्रावण की वर्षा पृथ्वी को हरा-भरा करती है और जल तथा पर्यावरण संरक्षण का प्राकृतिक संदेश देती है।