बाराबंकी

UP Crime: बाराबंकी ड्रग्स केस में 9 साल बाद फैसला, दो दोषियों को 10-10 साल की जेल

UP Crime: बाराबंकी रेलवे स्टेशन पर 2017 में हेरोइन और गांजे के साथ पकड़े गए दो आरोपियों को अदालत ने 10-10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। एनसीबी के मुताबिक, मादक पदार्थ नागालैंड के दीमापुर से लाए गए थे।
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प्रतीकात्मक तस्वीर। सोर्स-ANI

UP Crime: उत्तर प्रदेश में मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ कार्रवाई करते हुए नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) लखनऊ जोनल यूनिट को बड़ी सफलता मिली है। साल 2017 के बाराबंकी ड्रग्स तस्करी मामले में अदालत ने दो आरोपियों को दोषी ठहराते हुए 10-10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। दोनों आरोपियों को बाराबंकी रेलवे स्टेशन पर मादक पदार्थों के साथ पकड़ा गया था।

एनसीबी के मुताबिक, 19 अक्टूबर को बाराबंकी के अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत ने मामले की सुनवाई पूरी करने के बाद फैसला सुनाया। दोषियों की पहचान शकील और रामप्यारी के रूप में हुई है। शकील बाराबंकी जिले के चांदवारा गांव का निवासी है, जबकि रामप्यारी पल्हारी की रहने वाली है। दोनों गांव थाना सफदरगंज क्षेत्र में आते हैं।

फोटो-Ai

बाराबंकी रेलवे स्टेशन पर पकड़े गए थे दोनों आरोपी

यह मामला 27 मई 2017 का है। उस दिन एनसीबी लखनऊ की टीम ने विशेष खुफिया सूचना के आधार पर बाराबंकी रेलवे स्टेशन पर कार्रवाई की थी। इस दौरान प्लेटफॉर्म पर मौजूद दोनों आरोपियों की तलाशी ली गई।

तलाशी के दौरान उनके पास मौजूद काले रंग के बैग से मादक पदार्थ बरामद हुए। एनसीबी के अनुसार, बैगों से 340 ग्राम हेरोइन और 160 ग्राम गांजा मिला था। इसके बाद दोनों के खिलाफ मादक पदार्थों की तस्करी से जुड़ा मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई।

दीमापुर से बाराबंकी लाए गए थे मादक पदार्थ

जांच में सामने आया कि शकील और रामप्यारी अवध असम एक्सप्रेस से यात्रा कर रहे थे। दोनों बाराबंकी रेलवे स्टेशन पर ट्रेन से उतरे थे। जांच एजेंसी के मुताबिक, बरामद मादक पदार्थ नागालैंड के दीमापुर से बाराबंकी लाए गए थे।

एनसीबी ने मामले से जुड़े तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर जांच आगे बढ़ाई। इसके बाद मामला अदालत में पहुंचा, जहां सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने आरोपियों के खिलाफ अपना पक्ष रखा।

अदालत ने दोनों को सुनाई 10-10 साल की सजा

मुकदमे की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने मादक पदार्थों की तस्करी की गंभीरता और समाज पर इसके दुष्प्रभावों को अदालत के सामने रखा। अभियोजन ने दोनों आरोपियों को कड़ी सजा देने की मांग की। मामले से जुड़े साक्ष्यों और परिस्थितियों का परीक्षण करने के बाद अदालत ने दोनों आरोपियों को मादक पदार्थों की अवैध तस्करी का दोषी पाया। इसके बाद उन्हें 10-10 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई गई।

एनसीबी ने दोहराई जीरो टॉलरेंस नीति

एनसीबी ने इस फैसले को मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ अपनी जीरो टॉलरेंस नीति को मजबूत करने वाला बताया है। ब्यूरो ने कहा कि वह देश में नशे के अवैध कारोबार पर रोक लगाने और 'नशामुक्त भारत' के लक्ष्य को हासिल करने के लिए प्रतिबद्ध है। एनसीबी ने नागरिकों से अपील की है कि यदि उन्हें मादक पदार्थों की तस्करी से संबंधित कोई जानकारी मिलती है, तो वे मानस राष्ट्रीय नारकोटिक्स हेल्पलाइन के टोल फ्री नंबर 1933 पर सूचना दे सकते हैं। ब्यूरो के मुताबिक, सूचना देने वाले व्यक्ति की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी।

Updated on:
21 Oct 2026 05:19 pm
Published on:
21 Oct 2026 05:16 pm