बारां

घना कोहरा, कड़ाके की सर्दी, खुले में पतले से कंबल का सहारा

शीत लहर चल रही है और गलन बढ़ गई है। गर्म लबादों के साथ अलाव का भी सहारा लेना पड़ रहा है। इस हाड कंपाने वाली कड़ाके की ठंड में भी दुर्बल वर्ग के कई लोगों को खुले आसमान के नीचे रात गुजारनी पड़ रही है।

3 min read
Jan 06, 2026
source patrika photo

शूल सी चुभ रही शीतलहर के दौरान खुले में कट रही रैना

बारां. पहाड़ी क्षेत्रों में हो रही बर्फबारी के चलते जिले में भी तापमान में काफी गिरावट आ गई है। अब रात का तापमान 5 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है। शीत लहर चल रही है और गलन बढ़ गई है। गर्म लबादों के साथ अलाव का भी सहारा लेना पड़ रहा है। इस हाड कंपाने वाली कड़ाके की ठंड में भी दुर्बल वर्ग के कई लोगों को खुले आसमान के नीचे रात गुजारनी पड़ रही है। हालांकि नगरपरिषद की ओर से शहर में चार रैन बसेरे संचालित हैं। इनमें दो अस्थायी रैन बसेरे सर्दी के दिनों में शुरू किए है। इसके बाद भी प्रचार प्रसार नहीं होने, रैन बसेरे छोटे पडऩे और जगह की कमी समेत पर्याप्त सुविधा नहीं मिलने से लोगों को खुले स्थान पर रात काटनी पड़ रही है। पत्रिका टीम ने रविवार रात 11 बजे बाद शहर के चारमूर्ति चौराहा, रेलवे, बस स्टैंड, खजूरपुरा तिराहा, तेलफैक्ट्री निर्माणाधीन रेलवे ओवरब्रिज व स्टेशन रोड, प्रताप चौक आदि कुछ इलाकों में जायजा लिया। इस समय घना कोहरा छा गया था और विजिबिलिटी 50 मीटर से भी कम रह गई थी। ओंस की बूंदे गिर रही थी। गर्म कपड़े पहनने के बाद भी गलन से धूजणी छूट रही थी। ठंडी हवाएं शूल सी चुभ रही थी। ऐसी स्थिति में भी कोई हाथ ठेले पर सोता मिला और कोई निर्माणाधीन आरओबी के नीचे पिलर के सहारे दुबका था। एक वृद्ध पतले से कंबल को लपेट कर शरीर को हवा से बचाने का जतन करता मिला। 5 डिग्री की सर्द रात में इस तरह के नजारे देख लोग सिहर उठे। पत्रिका संवाददाता को फोटो क्लिक करते देखा तो वहां मित्र के साथ मौजूद समाजसेवी अजय खत्री ने कहा कि ऐसे लोगों के लिए पर्याप्त व्यवस्था होना चाहिए। हम सहयोग को तैयार हैं। डिवाइडर पर रात गुजारना जान आफत में डालने से कम नहीं है। गत 23 दिसंबर 2025 की रात एनएच 27 पर पलायथा के समीप मजबूरी में डिवाइडर पर रात गुजार रहे दो किसानों को एक स्लीपर बस ने कुचल दिया था। इससे दोनों की मौके पर सांसें थम गई थी। इसके बाद भी मजबूरी में लोग रात गुजार रहे है। शहर में रविवार रात 11.28 बजे खजूरपुरा तिराहा के समीप निर्माणाधीन आरओबी के नीचे पिलर के सहारे एक ठेले पर एक व्यक्ति दुबके हुए मिला। वर्षों से आरओबी अधूरा होने से कुछ वाहन बीच में डिवाइडर की जगह खड़े रहते हैं। वाहनों की आवाजाही रहती है। ऐसे में सोते हुए जरूरतमंद के साथ गंभीर हादसा होने का अंदेशा रहता है।

चारमूर्ति चौराहा : रात 10.52 बजे

चारमूर्ति चौराहा से स्टेशन रोड पर महक होटल तक पहुंचे तो कोहरे की आगोश में होने से चौराहा पर लगी शहीद क्रांतिकारियों की मूर्तियां यहां से साफ दिखाई नहीं दे रही, लेकिन एक दुकान के थड़े पर आधा दर्जन लोग रजाई कंबल में सा रहे थे। लोगों ने पूछने पर बताया कि एक दिन रैन बसेरे में सोने गए तो वहां किसी ने उसकी जेब से रुपए पैसे निकाल लिए। एक ओर वृद्ध ने बताया कि दिन में मजदूरी करते है, रात को रेलवे स्टेशन पर सोते हैं, लेकिन वहां से भी भगा दिया जाता है। मजबूरी में थड़े पर सोना पड़ रहा है।

बस स्टैंड : रात 11.13 बजे

कुंजेड निवासी 50 वर्षीय प्रेमचन्द मेघवाल पतले से कंबल में खुद को समेट कर लोहे की कुर्सी पर सोता मिला। आवाज लगाने पर वह सहम सा गया, कंपकपाते हुए किसी तरह नाम पता बताया। रेन बसेरे में जाने के लिए बोलने पर उसने कहा उसे नहीं पता कहां रैन बसेरा है। वहां रजाई और बिछाने को कुछ मिलेगा क्या, विश्वास दिलाने पर किसी तरह राजी हुआ तो उसे कुछ कदम की दूरी पर टेंट में बने नगरपरिषद के रैन बसेरे में छोड़ा। अन्दर लकड़ी तख्त पर गद्दों पर रजाई ओढ़$कर सोते लोगों को देखा तो मन प्रफुल्लित हो गया।

रात 11.41 बजे : पेंशनर भवन, स्टेशन रोड

यहां फुटपाथ पर बनी अस्थायी टापरी में एक युवक सोता मिला। युवक का कहना था कि नगरपरिषद धर्मशाला में जाते है तो वहां कमरे फुल होने की बात कहकर लौटा दिया जाता है। कई बार पहुंचने में देरी हो जाती तो धर्मशाला का गेट नहीं खोला जाता।

दो स्थानों नगरपरिषद के सामने सार्वजनिक धर्मशाला के पीछे और कोटा रोड पर अग्निशमन कार्यालय के समीप स्थायी रैन बसेरा संचालित है। इसके अलावा दो अस्थायी रैन बसेरे रोडवेज बस स्टैंड और जिला अस्पताल साइकिल स्टैंड के समीप संचालित किए हुए हैं। यहां अलाव जलाने के लिए लकड़ी व कंबल की व्यवस्था की जाएगी। प्रचार-प्रसार भी कराया जाएगा।

भुवनेश मीणा, आयुक्त नगरपरिषद

Published on:
06 Jan 2026 01:05 pm
Also Read
View All

अगली खबर