बारां

छोटी-छोटी बाडिय़ों में भाजी-तरकारी की बहार, सब्जी की खेती करके चला रहे परिवार

इस गांव की पहचान एक प्रमुख सब्जी उत्पादक गांव के रूप में जानी जाती है। गांव के 90 फीसदी किसान सब्जी की खेती करके अपने परिवार का पालन-पोषण करते हैं।

2 min read
Nov 04, 2024
इस गांव की पहचान एक प्रमुख सब्जी उत्पादक गांव के रूप में जानी जाती है। गांव के 90 फीसदी किसान सब्जी की खेती करके अपने परिवार का पालन-पोषण करते हैं।

जिले में सब्जी उत्पादक गांव के नाम से है रावलजावल की पहचान

मऊ. तहसील मांगरोल क्षेत्र के रावलजावल गांव में इस समय विभिन्न प्रकार की सब्जियों की बहार आई हुई है। मांगरोल क्षेत्र में इस गांव की पहचान एक प्रमुख सब्जी उत्पादक गांव के रूप में जानी जाती है। गांव के 90 फीसदी किसान सब्जी की खेती करके अपने परिवार का पालन-पोषण करते हैं। गांव के लोग सब्जी की खेती करने के मामले में काफी अनुभवी हैं। इस गांव में पीढी दर पीढी से सब्जियों की खेती की जाती रही है। इसलिए भावी पीढी को भी सब्जी की खेती करने का अनुभव और तकनीकी ज्ञान अपने बड़ों से ही विरासत में मिल जाता है।

यहां पर हर किसान सब्जी उत्पादक

अभी इस गांव में कई प्रकार की सब्जियों की बहार आई हुई है। अभी वर्तमान में सब्जी की बाडिय़ों में बैंगन, फूलगोभी, मिर्ची, टमाटर, लौकी, मेथी, पालक आदि सब्जियां प्रमुखता से सब्जी की बाडिय़ों में उगी हुई है। इसके पहले इस गांव में मिर्ची की खेती प्रमुखता से होती थी। यह गांव मांगरोल क्षेत्र का प्रमुख मिर्ची उत्पादक गांव होता था। लेकिन मिर्ची की फसल का उत्पादन कम मिलने के कारण सब्जी की खेती करने वाले गांव के किसानों का मिर्ची की खेती से मोह भंग हो गया। अब इक्के-दुक्के किसान ही वर्तमान में मिर्ची की खेती करते हैं।

छोटी बाडिय़ों में करते हैं सब्जियों की खेती

गांव के सब्जी की खेती करने वाले अधिकांश किसान लघु सीमांत किसानों की श्रेणी में आते हैं। इसी कारण से सब्जी की खेती करने वाले यहां के किसान छोटी-छोटी बाडियों में सब्जी की खेती करते हैं। गांव के सब्जी उत्पादक किसान दिनभर परिवार सहित सब्जी की बाडिय़ों में काम करते हैं। परिवार की महिलाएं भी सब्जी की बाडी में ङ्क्षनदाई, गुडाई, खरपतवार उन्मूलन आदि कार्यों को करके उनका सहयोग करती हैं। परिवार सहित ही कड़ी मेहनत करने के बाद ही सब्जी की फसल पैदा होती हैं।

स्वयं ही करते फसल में रोग का उपचार

सब्जी की खेती करते करते इस गांव के सब्जी उत्पादक किसान इतने अनुभवी और पारंगत हो गए हैं कि, जब सब्जी की फसल रोग युक्त हो जाती है तो वह स्वयं अपने स्तर पर ही सब्जी की फसल के रोग की पहेचान करके बाजार से रोग की दवा खरीद कर फसल का रोग का उपचार कर देते हैं।

बाजारों में बिकती है

इस गांव की अधिकांश उत्पादित सब्जियां आस-पास के कई शहरों और कस्बों के सब्जी के बाजारों और साप्ताहिक हाट-हटवाड़ो में बड़े पैमाने पर बिकती है। सब्जी के बाजारों में इस गांव की सब्जी का अच्छा योगदान रहता है।

पूरे साल करते हैं सब्जी की खेती

इस गांव के सब्जी की खेती करने वाले किसान पूरे बारह महीने ही विभिन्न प्रकार की सब्जियों की खेती करने के कार्यों में व्यस्त रहते हैं। तथा मौसम के अनुसार सब्जी की खेती करते हैं।

जमीनें ज्यादा नहीं होने से यह रास्ता अपनाया

गांव के अधिकांश सब्जी उत्पादक किसानों के पास ज्यादा जमीनें नहीं हैं। छोटे-छोटे रकबों में यह किसान सब्जी की खेती करते हैं। एक ही जमीन के टुकड़े में साल में तीन से चार बार सब्जी की विभिन्न प्रकार फसलें पैदा कर लेते हैं। जमीन के छोटे रकबों में सब्जी की खेती करके ही इस गांव के अधिकांश किसान अपने परिवार का भरण-पोषण करते हैं।

Published on:
04 Nov 2024 12:11 pm
Also Read
View All

अगली खबर