बारां

कभी लड़की की शादी में भी दी जाती थी चारपाई, अब केवल गांवों में आती है नजर, क्या आपके घर में है खटिया?

चारपाई को कुछ गांवों में पलंग तो कहीं पर खाट के नाम से पहचानते हैं। कोई खाटळो भी बोलते हैं तो छोटे बच्चों के लिए बने छोटे पलंग को मचली के नाम से जाना जाता है।

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Jun 23, 2024

हरनावदाशाहजी। तीन दशक पहले तक घर में हर बड़े सदस्य के लिए चारपाई (खाट) होती थी, लेकिन समय के साथ यह कम होती गई। शहरों में चारपाई की जगह लग्जरी डबल बैड और दीवान ने ले ली। चारपाई सिर्फ गांवों में ही पहचान बनाए हुए हैं। हालांकि अब यहां भी डबल बैड और दीवान का चलन बढ़ गया है। बैड और दीवान की तुलना में चारपाई को स्वास्थ्य की दृष्टि से ज्यादा फायदेमंद माना जाता है। यहीं कारण है कि कई घरों में पुरानी चारपाई सुरक्षित रखी हुई है।

सदियों से घरों में चारपाई का उपयोग होता रहा है। घुमन्तु परिवार की जरूरी चीजों में चारपाई भी होती है। वे जहां भी जाते है, उनकी जरूरत की चीजों के साथ चारपाई भी होती है। कई घरों में छोटे बच्चों के लिए एक विशेष तरह की चारपाई बनाई जाती थी। जिसमें बच्चों की सुरक्षा के लिए स्पेशल डबल डंडे लगाए जाते थे, लेकिन बदलते परिवेश में अब चारपाई का चलन कम हो रहा है। इससे लगता है भविष्य में म्यूजियम में ही चारपाई नजर आएगी।

अलग जगह पर अलग नाम से पहचान

चारपाई को कुछ गांवों में पलंग तो कहीं पर खाट के नाम से पहचानते हैं। कोई खाटळो भी बोलते हैं तो छोटे बच्चों के लिए बने छोटे पलंग को मचली के नाम से जाना जाता है। लकड़ी के चार पहियों पर चार लकड़ियां आपस में जोडी जाती है। जिन्हें ईस और ऊपला बोला जाता है। आयताकार रुप में तैयार इस चारपाई को रस्सी या निवार की मदद से विशेष तरीके से बुना जाता है।

समय के साथ बदल गया स्वरूप

पुराने समय में गर्मी के मौसम में खाट का विशेष महत्व था। इस पर सोने वाले के शरीर में चारों तरफ से हवा लगती। खेती बाड़ी काम से निपटने के बाद गर्मियों के दिनों में घर के बाहर बने उसारों चबूतरों पर ग्रामीण सणबीज का सूत कातकर डेरा की मदद से रस्सी बनाते थे। उस रस्सी से पलंग की बुनाई की जाती, लेकिन बाद में रस्सी का स्थान सूती व नायलोन के तारों से बनी निवार ने ले लिया है। अब शहरों में लोहे के पाइप के बने उठाव पलंग भी तैयार होने लगे हैं।

विवाह में चारपाई का विशेष महत्व

बेटियों की शादी में परिवार की ओर से दहेज में आकर्षक चारपाई भी दी जाती थी। तब कीमती सागवानए रोहिड़ा की लकड़ी तथा रंगीन सूत से बुनाई करके तैयार की गई चारपाई दी जाती थी। इस बुनाई में वर-वधू का नाम, विवाह की तारीख की लिखावट की डिजाइन विशेष कलाकारी मानी जाती थी।

अब ज्यादातर ढाबों में दिखती है खाट

अब गांवों में या फिर हाइवे के किनारे होटलों व ढाबों पर ही खाट या चारपाई देखने को मिलती है। ये ट्रक चालकए खलासी के सोने या आराम करने का लेकर रखी जाती है। पहले शादी में बारातियों को सोने के लिए चारपाई, गद्दा और तकिया दिया जाता था। इस तरह की आवभगत उस दौर में शाही व्यवस्था मानी जाती थी। घर वाले आसपास के घरों से बारातियों के लिए चारपाई की व्यवस्था करते थे।

ग्रामीण हाट में बिकते हैं जूट के पलंग

कस्बे समेत आसपास गांवों के साप्ताहिक हाट में वर्तमान में भी लकड़ी के पलंग बिकने आते हैं। एक पलंग विक्रेता ने बताया कि डिमांड कम हुई है लेकिन फिर भी गर्मी व बरसात में खरीदारी चलती है। वह बने बनाए सेट लाकर बेचते हैं। जिन्हें बाद में ग्रामीण अपने सुविधानुसार निवार या रस्सी से गूथ लेते हैं। ग्रामीणों के लिए डबल बैड सिंगल बेड के मुकाबले देशी तरीके से पलंग काफी मुफिद रहते हैं, लेकिन आज की चकाचौंध में इनका अस्तित्व खतरे में पड़ता दिखाई जान पड़ रहा है।

Updated on:
23 Jun 2024 04:47 pm
Published on:
23 Jun 2024 03:55 pm
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