अपराधियों की पहचान और मामलों के त्वरित खुलासे के लिए पुलिस ने टेक्नोलॉजी का बड़ा हथियार तैयार कर लिया है। नेशनल ऑटोमेटेड फिंगरप्रिंट आइडेंटिफिकेशन सिस्टम (NAFIS) के तहत प्रदेशभर में 8.5 लाख से ज्यादा अपराधियों के फिंगरप्रिंट का विशाल डाटा बैंक तैयार हो चुका है।
बरेली। अपराधियों की पहचान और मामलों के त्वरित खुलासे के लिए पुलिस ने टेक्नोलॉजी का बड़ा हथियार तैयार कर लिया है। नेशनल ऑटोमेटेड फिंगरप्रिंट आइडेंटिफिकेशन सिस्टम (NAFIS) के तहत प्रदेशभर में 8.5 लाख से ज्यादा अपराधियों के फिंगरप्रिंट का विशाल डाटा बैंक तैयार हो चुका है। इस अभियान में बरेली ने शानदार प्रदर्शन करते हुए प्रदेश में तीसरा स्थान हासिल किया है।
साल 2022 में शुरू हुए NAFIS सिस्टम के तहत प्रदेश के सभी जिलों में अपराधियों के फिंगरप्रिंट डिजिटल रूप से सुरक्षित किए जा रहे हैं। इस डाटा बैंक के जरिए अब घटनास्थल से मिले फिंगरप्रिंट का मिलान कर संदिग्धों की पहचान बेहद तेजी से की जा सकेगी, जिससे जांच की रफ्तार कई गुना बढ़ेगी।
फिंगरप्रिंट फीडिंग अभियान में बरेली ने बीते एक साल में 7233 अपराधियों का डाटा अपलोड कर प्रदेश में तीसरा स्थान हासिल किया है। इस उपलब्धि पर एसएसपी अनुराग आर्य को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। वहीं बुलंदशहर (9032) पहले और अलीगढ़ (7531) दूसरे स्थान पर रहे।
बरेली जोन का प्रदर्शन भी इस अभियान में शानदार रहा है। टॉप-10 में बरेली (तीसरा), बिजनौर (आठवां), मुरादाबाद (नौवां) और शाहजहांपुर (दसवां) स्थान पर रहे। इसके अलावा गौतमबुद्धनगर, मुजफ्फरनगर, गाजियाबाद और मेरठ जैसे जिले भी सूची में शामिल हैं।
फिलहाल NAFIS सेल एसएसपी कार्यालय में संचालित हो रहा है, जहां अपराधियों के फिंगरप्रिंट आधुनिक उपकरणों से लिए जाते हैं। अब योजना है कि हर थाने में ‘नाफिस सेल’ स्थापित किया जाए, ताकि मौके पर ही फिंगरप्रिंट लेकर तुरंत डाटा फीड किया जा सके और आरोपी को सीधे जेल भेजा जा सके।
पुलिस मुख्यालय स्तर पर हर महीने फिंगरप्रिंट फीडिंग की समीक्षा की जा रही है। सभी जिलों को 100% डाटा फीडिंग के निर्देश दिए गए हैं। महाराजगंज, उन्नाव और भदोही जैसे जिलों का प्रदर्शन फिलहाल कमजोर पाया गया है, जिन्हें सुधार के निर्देश दिए गए हैं।
एसएसपी अनुराग आर्य ने बताया कि NAFIS के तहत अपराधियों का डाटा तेजी से सुरक्षित किया जा रहा है। इससे घटनाओं के खुलासे में तेजी आएगी और अपराधियों की पहचान करना पहले से कहीं ज्यादा आसान हो जाएगा।