खुसरो ग्रुप के चेयरमैन शेर अली जाफरी की मुश्किलें बढ़ गई हैं। डी फार्मा फर्जीवाड़ा प्रकरण में एसएसपी अनुराग आर्य ने उनके अस्पताल की जांच कराने के निर्देश दिए हैं। एसपी साउथ मानुष पारीक को सीएमओ को पत्र लिखने को कहा गया है। इस मामले में एसआईटी ने कॉलेज के प्रधानाचार्य कामिल हुसैन जैदी से मंगलवार को दोबारा
बरेली। खुसरो ग्रुप के चेयरमैन शेर अली जाफरी की मुश्किलें बढ़ गई हैं। डी फार्मा फर्जीवाड़ा प्रकरण में एसएसपी अनुराग आर्य ने उनके अस्पताल की जांच कराने के निर्देश दिए हैं। एसपी साउथ मानुष पारीक को सीएमओ को पत्र लिखने को कहा गया है। इस मामले में एसआईटी ने कॉलेज के प्रधानाचार्य कामिल हुसैन जैदी से मंगलवार को दोबारा पूछताछ की और फर्जीवाड़े से संबंधित दस्तावेज अपने कब्जे में लिए हैं। खुसरो मेमोरियल पीजी कॉलेज में डी फार्मा में एडमिशन लेकर 379 छात्र-छात्राओं से 3.70 करोड़ रुपये की अवैध वसूली की गई थी।
इनके खिलाफ दर्ज हुआ था मुकदमा
जिनमें खुसरो ग्रुप एवं कॉलेज के चेयरमैन शेर अली जाफरी, उसके बेटे, आस्था कंसल्टेंसी के प्रोपराइटर डॉ. विजय शर्मा, कथित प्रधानाचार्य विश्वनाथ शर्मा और शिक्षक तारिक को आरोपी बनाया गया है। एसएसपी अनुराग आर्य के संज्ञान में आया है कि शेर अली जाफरी ने मिनी बाईपास पर मानकों को दरकिनार कर खुसरो हॉस्पिटल बना रखा है। इसमें किसी भी मानक का पालन नहीं किया गया है। पूर्व में स्वास्थ्य विभाग इस अस्पताल के खिलाफ कार्रवाई भी कर चुका है।
एसआईटी ने दूसरे दिन भी की जांच पड़ताल
एसपी साउथ मानुष पारीक के नेतृत्व में गठित एसआईटी इसकी जांच कर रही है। एसआईटी ने मंगलवार को लगातार दूसरे दिन खुसरो मैमोरियल पीजी कॉलेज के प्रधानाचार्य कामिल हुसैन जैदी से पूछताछ की। अब डॉ. विजय शर्मा पर भी शिकंजा कसेगा। पूछताछ के दौरान प्रधानाचार्य कामिल हुसैन जैदी ने डी फार्मा के छात्रों के एडमिशन, फीस रिकॉर्ड, पंजीकरण, कॉलेज के शिक्षकों आदि से संबंधित डाटा एसआईटी को सौंपा। इसमें आस्था कंसल्टेंसी के प्रोपराइटर डॉ. विजय शर्मा को किए गए भुगतान के साक्ष्य भी दिए गए हैं। इससे डॉ. विजय शर्मा पर भी अब शिकंजा कसने की तैयारी है। साथ ही प्रधानाचार्य ने खुद को निर्दोष बताते हुए डी फार्मा से कोई लेनदेन न होने की बात कही है।
बीडीए से पास नहीं हॉस्पिटल फायर की भी नहीं एनओसी
खुसरो अस्पताल का रजिस्ट्रेशन नवीनीकरण कराने के लिए फायर ब्रिगेड कि एनओसी जरुरी है। अस्पताल के पास फायर की एनओसी नहीं है। बरेली विकास प्राधिकरण से नक्शा स्वीकृत नहीं है। अवैध होने की वजह से एक बार हॉस्पिटल बंद हो चुका है। जिस पर आरोपियों ने नाम बदलकर अस्पताल को दोबारा शुरू कर दिया। अब डॉ जफर अली जाफरी ने एच ए खुसरो हासपिटल नाम से रजिस्ट्रेशन करा लिया।