होली की तारीख नजदीक आते ही रेलवे स्टेशनों पर भीड़ और बेचैनी दोनों बढ़ गई हैं। रंगों के पर्व पर घर पहुंचने की उम्मीद लगाए यात्रियों के लिए मार्च का पहला सप्ताह मुश्किल बन गया है। बरेली से गुजरने वाली अप-डाउन ट्रेनों में कन्फर्म टिकट मिलना फिलहाल टेढ़ी खीर है।
बरेली। होली की तारीख नजदीक आते ही रेलवे स्टेशनों पर भीड़ और बेचैनी दोनों बढ़ गई हैं। रंगों के पर्व पर घर पहुंचने की उम्मीद लगाए यात्रियों के लिए मार्च का पहला सप्ताह मुश्किल बन गया है। बरेली से गुजरने वाली अप-डाउन ट्रेनों में कन्फर्म टिकट मिलना फिलहाल टेढ़ी खीर है। बुकिंग चार्ट देखते ही यात्रियों की धड़कनें बढ़ रही हैं और अब सबकी निगाहें रेलवे की ओर से घोषित होने वाली विशेष ट्रेनों की समय-सारिणी पर टिकी हैं।
बरेली होकर रोजाना औसतन 195 ट्रेनों का आवागमन होता है, लेकिन इन दिनों कोहरे की मार ने व्यवस्था और उलझा दी है। करीब 38 गाड़ियां निरस्त हैं। राहत की बात बस इतनी है कि मार्च के पहले सप्ताह से इनका संचालन फिर शुरू हो जाएगा। मगर इससे पहले ही इन ट्रेनों की अग्रिम बुकिंग यात्रियों ने फुल कर दी है। नतीजा मार्च के पहले हफ्ते की सीटें पहले से ही भर चुकी हैं।
यात्रा के पीक सीजन में कई लोकप्रिय ट्रेनों में लंबी वेटिंग के चलते टिकट बुकिंग तक बंद करनी पड़ी है। वाराणसी–आनंद विहार साप्ताहिक, राजधानी एक्सप्रेस (20503-04), श्रमजीवी एक्सप्रेस (12392-91), अवध-असम एक्सप्रेस (15910-09), सहरसा गरीब रथ (12204-05), दिल्ली–हावड़ा साप्ताहिक सुपरफास्ट (12372-73), मुजफ्फरपुर सुपरफास्ट (19269) जैसी गाड़ियों में होली के आसपास सीट मिलना लगभग असंभव हो गया है। इतना ही नहीं, वाराणसी गरीब रथ (22542-43), काशी विश्वनाथ एक्सप्रेस (15127), राप्ती गंगा एक्सप्रेस (15005-06) के साथ अयोध्या एक्सप्रेस, पद्मावत एक्सप्रेस और लखनऊ मेल जैसी ट्रेनें भी यात्रियों को ‘माफी’ लिखे संकेत दे रही हैं—बुकिंग बंद, विकल्प सीमित।
यात्रियों को अब बस एक ही सहारा दिख रहा है—होली स्पेशल ट्रेनें। रेलवे यदि समय रहते विशेष गाड़ियों की घोषणा करता है तो हजारों यात्रियों को राहत मिल सकती है। स्टेशन परिसर, रिजर्वेशन काउंटर और ऑनलाइन पोर्टल पर यही चर्चा है कि स्पेशल ट्रेनों के फेरे बढ़े तो त्योहार की खुशी पटरी पर लौट सकती है। फिलहाल, होली से पहले घर पहुंचने की जद्दोजहद जारी है। रंगों का त्योहार कब टिकट के रंग दिखाएगा, इसका जवाब रेलवे की अगली घोषणा में छिपा है।