भारत-पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव के मद्देनज़र गृहमंत्रालय के निर्देश पर बुधवार रात शहर में सिविल डिफेंस की ओर से मॉक ड्रिल व ब्लैकआउट अभ्यास किया गया। रात 8 बजे 10 मिनट के लिए पूरे शहर की बत्तियां बुझा दी गईं। प्रमुख बाजारों, कॉलोनियों और मोहल्लों में लोगों ने सहयोग करते हुए अपने घरों, प्रतिष्ठानों और धार्मिक स्थलों की लाइटें बंद कर दीं।
बरेली। भारत-पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव के मद्देनज़र गृहमंत्रालय के निर्देश पर बुधवार रात शहर में सिविल डिफेंस की ओर से मॉक ड्रिल व ब्लैकआउट अभ्यास किया गया। रात 8 बजे 10 मिनट के लिए पूरे शहर की बत्तियां बुझा दी गईं। प्रमुख बाजारों, कॉलोनियों और मोहल्लों में लोगों ने सहयोग करते हुए अपने घरों, प्रतिष्ठानों और धार्मिक स्थलों की लाइटें बंद कर दीं। 1971 की जंग के बाद शहर में पहली बार ऐसा ब्लैकआउट देखा गया।
सिविल डिफेंस के अधिकारियों ने इस अभ्यास को युद्ध या आपातकाल जैसी परिस्थितियों से निपटने की तैयारी बताया। ब्लैकआउट के दौरान शहर के कुतुबखाना, सैटेलाइट, कोतवाली, स्टेडियम रोड, सिविल लाइंस, बरेली जंक्शन सहित अन्य इलाकों की सड़कों पर पूरी तरह अंधेरा छा गया। गली-मोहल्लों में भी लोग मॉक ड्रिल का हिस्सा बने।
ब्लैकआउट के दौरान ट्रैफिक को कुछ जगहों पर नियंत्रित किया गया। स्टेडियम रोड, मालियों की पुलिया समेत अन्य क्षेत्रों में सुरक्षा के लिहाज से वाहनों की आवाजाही कुछ समय के लिए रोक दी गई। कई स्थानों पर अंधेरे के चलते सन्नाटा और कुछ जगहों पर थोड़ी देर के लिए जाम की स्थिति भी बनी। आईवीआरआई परिसर व आसपास के क्षेत्रों में मॉक ड्रिल के तहत आपातकालीन अभ्यास किया गया।
इसमें आपदा प्रबंधन विशेषज्ञों के साथ मेडिकल टीम, फायर ब्रिगेड और एनसीसी कैडेट्स ने भाग लिया। मंडलायुक्त सौम्या अग्रवाल की मौजूदगी में और जिलाधिकारी अविनाश सिंह के निर्देशन में यह मॉक ड्रिल सम्पन्न हुआ। ड्रिल के दौरान आपदा विशेषज्ञों ने आम नागरिकों, विद्यार्थियों और एनसीसी कैडेट्स को आपातकालीन स्थिति में किए जाने वाले आवश्यक कार्यों की जानकारी दी।