बरेली

कमिश्नरी बार एसोसिएशन चुनाव परिणाम घोषित, निर्विरोध अध्यक्ष चुनी गईं सीमा दीक्षित, सुधीर सक्सेना बने सचिव

कमिश्नरी बार एसोसिएशन के वार्षिक चुनाव के परिणाम घोषित कर दिए गए हैं। चुनाव में अधिवक्ता सीमा दीक्षित को सर्वसम्मति से निर्विरोध अध्यक्ष चुना गया। उनके निर्वाचन पर अधिवक्ताओं ने हर्ष जताया। नवनिर्वाचित कार्यकारिणी का कार्यकाल 31 दिसंबर 2026 तक रहेगा।

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Jan 15, 2026

बरेली। कमिश्नरी बार एसोसिएशन के वार्षिक चुनाव के परिणाम घोषित कर दिए गए हैं। चुनाव में अधिवक्ता सीमा दीक्षित को सर्वसम्मति से निर्विरोध अध्यक्ष चुना गया। उनके निर्वाचन पर अधिवक्ताओं ने हर्ष जताया। नवनिर्वाचित कार्यकारिणी का कार्यकाल 31 दिसंबर 2026 तक रहेगा।

चुनाव में एकमात्र सचिव पद पर मतदान कराया गया, जहां कड़ा मुकाबला देखने को मिला। इस पद के लिए सुधीर सक्सेना और राजेंद्र पाल सिंह आमने-सामने थे। मतगणना के बाद सुधीर सक्सेना को 16 वोट प्राप्त हुए, जबकि राजेंद्र पाल सिंह को 12 वोट मिले। चार मतों के अंतर से सुधीर सक्सेना को सचिव पद पर विजयी घोषित किया गया।

अन्य पदों पर निर्विरोध निर्वाचन

कमिश्नरी बार एसोसिएशन के अधिकांश पदों पर निर्विरोध निर्वाचन हुआ। उपाध्यक्ष पद पर मोनेंद्र सिंह चुने गए। संयुक्त सचिव के दो पदों पर नीलम शर्मा और रामकिशन मिश्रा ने जीत दर्ज की, जबकि कोषाध्यक्ष पद की जिम्मेदारी सुबीर रस्तोगी को सौंपी गई है।

शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ चुनाव

एल्डर कमेटी के चेयरमैन एडवोकेट सुबोध जौहरी ने बताया कि संविधान के प्रावधानों के अनुसार चुनाव प्रक्रिया पूरी की गई। एल्डर कमेटी के सदस्य एवं चुनाव अधिकारी अरविंद भटनागर की देखरेख में चुनाव शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ। उन्होंने बताया कि पूर्व चेयरमैन पीसी सहगल के निधन के बाद उन्होंने यह दायित्व संभाला है।

18 तहसीलों के वकीलों से जुड़ी है कमिश्नरी बार

चेयरमैन सुबोध जौहरी ने बताया कि कमिश्नरी बार एसोसिएशन का इतिहास काफी पुराना है। बरेली मंडल की 18 तहसीलों के अधिवक्ता इससे जुड़े हुए हैं। भले ही यहां बैठने वाले अधिवक्ताओं की संख्या कम प्रतीत होती हो, लेकिन इसका प्रभाव पूरी कमिश्नरी की तहसीलों तक है।

बार और बेंच में समन्वय प्राथमिकता : सीमा दीक्षित

निर्विरोध अध्यक्ष चुनी गईं सीमा दीक्षित ने कहा कि उनकी प्राथमिकता बार और बेंच के बीच बेहतर सामंजस्य स्थापित करना है। उन्होंने कहा कि अधिक से अधिक कार्यदिवसों में न्यायिक कार्य हो, ताकि दूर-दराज की तहसीलों और गांवों से आने वाले वादकारियों को समय पर न्याय मिल सके और वे सुरक्षित अपने घर लौट सकें।

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