बरेली

डिजिटल लर्निंग हब से बदलेगी पढ़ाई की तस्वीर, रुहेलखंड यूनिवर्सिटी में शुरू हुई डिस्टेंस एजुकेशन, बिना कॉलेज जाए बनेगी डिग्री

महात्मा ज्योतिबा फुले रुहेलखंड विश्वविद्यालय (रुविवि) को नैक से ए प्लस प्लस ग्रेड मिलने के बाद शैक्षणिक गतिविधियों को नई रफ्तार मिल गई है। इसी कड़ी में विश्वविद्यालय को यूजीसी की ओर से आठ पाठ्यक्रमों में दूरस्थ शिक्षा (डिस्टेंस लर्निंग) की मान्यता मिल चुकी है।

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Jan 06, 2026

बरेली। महात्मा ज्योतिबा फुले रुहेलखंड विश्वविद्यालय (रुविवि) को नैक से ए प्लस प्लस ग्रेड मिलने के बाद शैक्षणिक गतिविधियों को नई रफ्तार मिल गई है। इसी कड़ी में विश्वविद्यालय को यूजीसी की ओर से आठ पाठ्यक्रमों में दूरस्थ शिक्षा (डिस्टेंस लर्निंग) की मान्यता मिल चुकी है। इन पाठ्यक्रमों में पहले चरण के प्रवेश पूरे हो चुके हैं, जबकि दूसरे चरण के दाखिले फरवरी में कराए जाएंगे।

यूजीसी से जिन पाठ्यक्रमों को दूरस्थ शिक्षा की मंजूरी मिली है, उनमें एमए इतिहास, अर्थशास्त्र, हिंदी, शिक्षा, अंग्रेजी, एमएससी गणित, एमकॉम और बीए शामिल हैं। इससे बरेली और मुरादाबाद मंडल समेत आसपास के जिलों के विद्यार्थियों को घर बैठे उच्च शिक्षा हासिल करने का अवसर मिलेगा। खास बात यह है कि नैक में उत्कृष्ट ग्रेड प्राप्त विश्वविद्यालयों को ही दूरस्थ शिक्षा की अनुमति दी जाती है।

विश्वविद्यालय परिसर में अत्याधुनिक डिजिटल लर्निंग हब का निर्माण किया जा रहा है। यह हब ई-कंटेंट निर्माण, ऑनलाइन कोर्स और हाइब्रिड लर्निंग के लिए वन-स्टॉप सेंटर के रूप में विकसित किया जाएगा। इसके जरिए दूर-दराज के विद्यार्थी भी ऑनलाइन माध्यम से पढ़ाई कर सकेंगे। शिक्षक भी डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए छात्रों से सीधे जुड़कर अध्यापन कर सकेंगे। इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) तकनीक का भी उपयोग किया जाएगा।

कुलपति प्रो. कृष्ण पाल सिंह ने कहा कि उच्च शिक्षा संस्थानों में ए प्लस प्लस नैक का सर्वोच्च ग्रेड है। इसके चलते रुवि को आठ पाठ्यक्रमों में दूरस्थ शिक्षा की मान्यता मिली है, जो रुहेलखंड क्षेत्र के छात्रों के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का सशक्त माध्यम बनेगी। डिजिटल लर्निंग हब के जरिए इसे और विस्तार दिया जाएगा।

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