जनपद न्यायालय में एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है, जहां मृत व्यक्ति के दस्तावेज लगाकर आरोपी की जमानत कराई गई। इतना ही नहीं, दस्तावेजों पर मृतक के नाम से अंगूठे के निशान और हस्ताक्षर तक किए गए।
बरेली। जनपद न्यायालय में एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है, जहां मृत व्यक्ति के दस्तावेज लगाकर आरोपी की जमानत कराई गई। इतना ही नहीं, दस्तावेजों पर मृतक के नाम से अंगूठे के निशान और हस्ताक्षर तक किए गए। मामला उजागर होते ही अदालत परिसर में खलबली मच गई। प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) सुरेश कुमार दुबे ने प्रशासनिक जांच के आदेश दिए हैं और 27 मार्च तक विस्तृत रिपोर्ट तलब की है।
पूरा मामला थाना बारादरी में वर्ष 2023 में दर्ज मुकदमा संख्या 707 से जुड़ा है। वादी शारिक अब्बासी का आरोप है कि आरोपी शमशाद हुसैन व अन्य ने 23 अक्टूबर 2024 को अदालत में आत्मसमर्पण कर जमानत प्राप्त की। जमानत के दौरान शमशाद की ओर से अनीस अहमद नाम के व्यक्ति को जमानती के रूप में पेश किया गया और उसके आधार कार्ड, वाहन की आरसी और फोटो अदालत में दाखिल किए गए।
जांच में सामने आया कि जिस अनीस अहमद को जमानती दिखाकर अदालत में पेश किया गया, उसकी मृत्यु 27 जून 2023 को ही हो चुकी थी। नगर निगम द्वारा जारी मृत्यु प्रमाण पत्र में इसका स्पष्ट उल्लेख है। यानी मौत के करीब सवा साल बाद मृत व्यक्ति के नाम पर फर्जी अंगूठे का निशान लगाकर अदालत को गुमराह किया गया।
वादी शारिक अब्बासी का आरोप है कि जब उन्होंने इस फर्जीवाड़े के साक्ष्य जुटाकर शिकायत की तो आरोपियों ने तत्कालीन न्यायालय लिपिक राजकुमार के साथ साठगांठ कर ली। आरोप है कि अदालत की पत्रावली से फर्जी जमानतनामा हटाकर उसकी जगह दूसरा जमानतनामा रख दिया गया, ताकि पूरे फर्जीवाड़े के सबूत मिटाए जा सकें।
मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट सुरेश कुमार दुबे ने पूरे प्रकरण की विधिवत जांच के आदेश दिए हैं। जनपद न्यायालय के प्रशासनिक अधिकारी को निर्देश दिया गया है कि पूरे मामले की विस्तृत जांच कर 27 मार्च तक रिपोर्ट प्रस्तुत करें।
कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि न्यायहित में यह बेहद आवश्यक है कि इस जालसाजी में शामिल आरोपियों और संभावित विभागीय कर्मचारियों की भूमिका सामने आए। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो संबंधित लोगों के खिलाफ कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।