
बरेली। कार्तिक पूर्णिमा पर इस बार भी श्रद्धालुओं को अपनी जान खतरे में डालकर गंगा स्नान के लिए जाना पड़ा। सुरक्षा और सरंक्षा का दावा करने वाली भारतीय रेलवे का खतरनाक सफर करने को लोग आज भी मजबूर हुए। कार्तिक पूर्णिमा होने की वजह से ट्रेनों में पैर रखने तक की जगह नहीं थी आलम ये था कि जितने लोग ट्रेन के अंदर थे उतने ही ट्रेन के ऊपर थे। इस खतरनाक सफर को करने में लोगो को कोई आनंद नहीं आ रहा था लेकिन करे भी तो क्या, कोई और उपाय भी तो नहीं है। इसी वजह से लोग जान जोखिम में डालकर मौत का सफर करने को मजबूर हुए।
मजबूरी में मौत का सफर
बरेली की राम गंगा में हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी कार्तिक पूर्णिमा पर हजारों लोगों ने श्रद्धा की डुबकी लगाईं और जान जोखिम में डालकर भारतीय रेल का सफर किया। दरअसल रेलवे जानते हुए भी हर वर्ष मेला के लिए कोई ख़ास इंतजाम नहीं करता है और यही वजह है कि लोग जान जोखिम में डालते है। रेलवे की इस लापरवाही की वजह से कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है ऐसा लगता है मानो रेलवे के अफसर किसी बड़े हादसे का इंताजर कर रहे है । गाड़ी नंबर 54078 दिल्ली पैसेंजर ट्रेन, दिल्ली से बरेली आने वाली इस ट्रेन में मौत के सफर को रोकने वाला कोई नहीं था, न तो रेल प्रशासन ही इसको रोकने की जहमत उठा रहा था और न ही जीआरपी और आरपीएफ का कोई जवान ।