नगर निगम ने गृहकर बकायेदारों पर ऐसा शिकंजा कसा है कि शहरभर में हड़कंप मच गया है। टैक्स वसूली को लेकर अपनाई गई सख्ती का नतीजा साफ दिख रहा है। अलग-अलग जोनों से अब तक 50.42 करोड़ रुपये सीधे निगम के खाते में पहुंच चुके हैं।
बरेली। नगर निगम ने गृहकर बकायेदारों पर ऐसा शिकंजा कसा है कि शहरभर में हड़कंप मच गया है। टैक्स वसूली को लेकर अपनाई गई सख्ती का नतीजा साफ दिख रहा है। अलग-अलग जोनों से अब तक 50.42 करोड़ रुपये सीधे निगम के खाते में पहुंच चुके हैं। जो लोग वर्षों से टैक्स टालते आ रहे थे, वे अब कतारों में खड़े नजर आ रहे हैं, जबकि नियमित करदाताओं की संख्या ने अब तक का रिकॉर्ड तोड़ दिया है।
मुख्य कर निर्धारण अधिकारी पीके द्विवेदी ने बताया कि इस अभियान का सबसे बड़ा असर यह है कि 25 हजार ऐसे गृहकरदाता सामने आए हैं, जिन्होंने जीवन में पहली बार टैक्स जमा किया है। चालू वित्त वर्ष में अब तक 57,673 लोग गृहकर चुका चुके हैं, जो पिछले वर्ष की तुलना में करीब 25 हजार अधिक हैं।
शासन के स्पष्ट निर्देश पर नगर निगम बरेली ने इस बार शत-प्रतिशत वसूली का लक्ष्य तय किया है। इसी के तहत शहर के 2.20 लाख से अधिक मकानों को बकाया नोटिस थमा दिए गए। नोटिस मिलते ही टैक्स न भरने वालों में अफरा-तफरी मच गई और बड़ी संख्या में करदाता निगम कार्यालयों के साथ-साथ ऑनलाइन पोर्टल पर पहुंच गए। नतीजतन, हजारों बकायेदारों ने एकमुश्त भुगतान कर दिया। अधिकारियों का साफ कहना है कि एसआईआर कार्य के चलते फिलहाल स्टाफ पर अतिरिक्त दबाव है, लेकिन इसके पूरा होते ही सीलिंग और कुर्की अभियान पूरी ताकत से शुरू होगा। निगम ने दो टूक चेतावनी दी है कि आगे किसी भी बकायेदार को बख्शा नहीं जाएगा। मौजूदा रफ्तार बनी रही तो इस वित्त वर्ष में सवा लाख से ज्यादा गृहकरदाता टैक्स जमा करेंगे।
वसूली के मामले में डिजिटल भुगतान सबसे आगे रहा है। ऑनलाइन और पीओएस सिस्टम के जरिए बड़ी रकम निगम तक पहुंची है, जबकि ऑफलाइन भुगतान भी लगातार जारी है। निगम ने करदाताओं को राहत देते हुए यह भी स्पष्ट किया है कि दिसंबर माह तक गृहकर जमा करने पर 5 प्रतिशत की छूट दी जा रही है। समय पर टैक्स अदा करने वालों को अब तक 2.53 करोड़ रुपये की छूट दी जा चुकी है। निगम का साफ संदेश है—ईमानदारी का फायदा मिलेगा, लेकिन टालमटोल की कीमत चुकानी पड़ेगी। कुल मिलाकर नगर निगम का सख्त रुख असर दिखा रहा है। अब गृहकर से बचने का कोई रास्ता नहीं, भुगतान ही एकमात्र विकल्प है।