मंगलवार को शेख अब्दुल कादिर जिलानी बगदादी की याद में सैलानी रजा चौक से जुलूस-ए-गौसिया निकाला गया। इस जुलूस में रंग-बिरंगी पोशाकों में कुछ अंजुमनों ने भाग लिया। जुलूस की अगुवाई अंजुमन गौसो रजा ने की, और इसकी सरपरस्ती दरगाह प्रमुख मौलाना सुब्हानी मियां ने की।
बरेली। मंगलवार को शेख अब्दुल कादिर जिलानी बगदादी की याद में सैलानी रजा चौक से जुलूस-ए-गौसिया निकाला गया। इस जुलूस में रंग-बिरंगी पोशाकों में कुछ अंजुमनों ने भाग लिया। जुलूस की अगुवाई अंजुमन गौसो रजा ने की, और इसकी सरपरस्ती दरगाह प्रमुख मौलाना सुब्हानी मियां ने की। जुलूस का आयोजन कड़ी सुरक्षा के बीच किया गया, जिसमें पुलिस प्रशासन पूरी तरह से अलर्ट रहा, खासकर बहराइच की हालिया घटना को देखते हुए।
जुलूस का आयोजन और शिरकत:
मीडिया प्रभारी नासिर कुरैशी के अनुसार, सैलानी रजा चौक से शुरू हुए जुलूस में "या गौस" की सदाएं बुलंद हुईं। इस जुलूस की कयादत सज्जादानशीन मुफ्ती अहसन मियां और मौलाना सुब्हानी मियां ने की। अंजुमनों ने रंग-बिरंगे कपड़ों में शामिल होकर इस धार्मिक आयोजन को भव्यता प्रदान की। जुलूस आयोजक हाजी शारिक नूरी, मुस्तफा नूरी, अफजलुद्दीन, वामिक रजा, और जमन रजा ने मिलकर मुफ्ती अहसन मियां और मोहसिन हसन खान का फूलों से जोरदार स्वागत किया। सय्यद बिलाल अली को गौसिया परचम सौंपकर जुलूस को रवाना किया गया।
संदेश और उपदेश:
जुलूस से पहले मुफ्ती बशीर उल कादरी और मौलाना जाहिद रजा ने शेख अब्दुल कादिर बगदादी की करामतों का वर्णन किया। उन्होंने बताया कि चाहे कितनी भी बड़ी मुश्किल आ जाए, सच और सब्र का दामन कभी नहीं छोड़ना चाहिए। उन्होंने मजहब के प्रति सख्ती से खड़े रहने और अल्लाह तथा उसके रसूल के बताए रास्ते पर चलने की बात कही। नातख्वां आजम तहसीनी ने नात और मनकबत पेश कीं, और जुलूस की दुआ मुफ्ती अहसन मियां ने की।
कड़ी सुरक्षा और जुलूस का मार्ग:
जुलूस अपने कदीमी मार्गों से गुजरते हुए सैलानी रजा चौक, मुन्ना खां का नीम, साजन पैलेस, और जगतपुर होते हुए देर रात दरगाह शाहदाना वली पहुंचकर समाप्त हुआ। रास्ते भर लोगों ने फूलों से जुलूस का स्वागत किया। अंजुमन ताजुशशरिया और अंजुमन गौस ओ रजा सबसे आगे थीं, जबकि पीछे पुलिस बल लगातार गश्त करता रहा।