
बरेली। धनतेरस (Dhanteras) से दीपावली के पांच दिवसीय पर्वों की शुरुआत हो जाएगी। प्रदोष व्यापिनी कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रियोदशी के दिन धन-त्रियोदशी मनायी जाती है। इस बार सोमवार को हस्तनक्षत्र , सोम प्रदोष (Som Pradosh) में धनतेरस होना महत्वपूर्ण माना जा रहा है।इस दिन चुर्तमास की समाप्ति होगी, हस्तनक्षत्र रात्रि 8ः37 बजे तक रहेगा एवं त्रियोदशी तिथि पूरे दिन रहेगी। ज्योतिषाचार्य पंडित राजीव शर्मा के अनुसार धनत्रयोदशी (Dhantrayodashi) पर धन देवता कुबेर की साधना करने का प्रचलन है। सामान्यतः यह साधना रात्रि में की जाती है। धन देवता कुबेर की साधना से दरिद्रता समाप्त होती है।
कैसे करें पूजा (Dhanteras Laxmi Kuber Puja Vidhi)
इनकी पूजा के लिए चैकी पर लाल वस्त्र बिछाकर उस पर अक्षतों से अष्ट दल का निर्माण कर उसके ऊपर कुबेर जी की मूर्ति, चित्र स्थापित कर एक सुपारी पर मौली लपेटकर उन्हें गणेश के रूप में गणेशम्बिका आदि का विधिवत् पूजन करे, उसके बाद भी माँ लक्ष्मी जी एवं कुबेर जी के मंत्र का जाप करें।
माँ लक्ष्मी का मन्त्र-
ऊँ श्रीं हीं श्री कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं हृीं श्रीं महालक्ष्मयै नमः।
कुबेर जी का मऩ्त्र।
ऊँ श्रीं ऊँ हृीं क्लीं श्री क्लीं वित्तेश्वराय नमः।
धनतेरस पर शुभ मुहूर्त (Dhanteras Shubh Muhurat)
सोमवार को धन्वन्तरि पूजा, मुहुर्त प्रातः काल 09ः18 बजे से 10ः45 बजे तक शुभ के चैघड़िया मुहुर्त में रहेगा।
बर्तन एवं आभूषण क्रय मुहुर्त अपराह्न 2ः47 बजे से 04ः19 बजे तक लाभ के चैघड़िया में शुभ रहेगा।
यम दीप दान मुहुर्त सायं काल 5ः32 से 6ः45 बजे तक प्रदोश काल निशा मुख में शुभ रहेगा।
कुबेर पूजन मुहुर्त रात्रि काल में शुभ रहेगा।
धनत्रयोदशी के दिन इन बातों का रखें ध्यान
इस दिन दोपहर में धातु के बर्तन एवं सोने चांदी इत्यदि आभूषण क्रय करना शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इनके साथ ही घर में लक्ष्मी का आगमन होता है।
धनत्रयोदशी पर सांयकाल दीपक प्रज्वलित करें तथा पूरे घर में प्रकाश करें।