स्वच्छ भारत मिशन के तहत शहर में बनाए गए एमआरएफ (मैटेरियल रिकवरी फैसिलिटी) सेंटर बिजली कनेक्शन के इंतजार में बंद पड़े हैं। नगर निगम ने बिजली कनेक्शन के लिए करीब 21 महीने पहले ही 1.57 लाख रुपये जमा कर दिए थे, लेकिन दो सेंटरों पर अब तक बिजली नहीं पहुंची।
बरेली। स्वच्छ भारत मिशन के तहत शहर में बनाए गए एमआरएफ (मैटेरियल रिकवरी फैसिलिटी) सेंटर बिजली कनेक्शन के इंतजार में बंद पड़े हैं। नगर निगम ने बिजली कनेक्शन के लिए करीब 21 महीने पहले ही 1.57 लाख रुपये जमा कर दिए थे, लेकिन दो सेंटरों पर अब तक बिजली नहीं पहुंची। इससे कचरा प्रबंधन की अहम योजना अधर में लटक गई है और स्वच्छ सर्वेक्षण में शहर की रैंकिंग पर असर पड़ने का खतरा पैदा हो गया है।
नगर निगम के प्रभारी अधिकारी (एसडब्ल्यूएम) राजीव कुमार राठी ने विद्युत नगरीय वितरण खंड-चतुर्थ को पत्र भेजकर इस लापरवाही पर नाराजगी जताई है। उन्होंने बताया कि बिजली विभाग ने मार्च 2024 में एमआरएफ सेंटरों पर बिजली कनेक्शन देने के लिए 1,57,228 रुपये का प्राक्कलन दिया था। नगर निगम ने यह पूरी राशि 3 जून 2024 को एनईएफटी के जरिए जमा भी कर दी थी, लेकिन इसके बावजूद अब तक सभी केंद्रों पर कनेक्शन नहीं दिया गया।
बिजली विभाग ने पीलीभीत रोड स्थित डेलापीर मंडी के आगे बने डलाव घर के पास एमआरएफ सेंटर पर तो बिजली कनेक्शन दे दिया, लेकिन सिठौरा पानी की टंकी के पास और मिनी बाईपास पर प्रस्तावित बस अड्डे के पास बने एमआरएफ सेंटर अब भी अंधेरे में हैं। बिजली न होने के कारण इन सेंटरों पर कचरा छंटाई और प्रोसेसिंग का काम शुरू ही नहीं हो पा रहा है।
नगर निगम का कहना है कि शासन स्तर पर डेडिकेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (डीसीसीसी) के जरिए एमआरएफ सेंटरों के संचालन की नियमित मॉनिटरिंग की जा रही है। ऐसे में सेंटर बंद रहने से नगर निगम की छवि पर भी असर पड़ रहा है। साथ ही स्वच्छ सर्वेक्षण 2025-26 में शहर की स्वच्छता रैंकिंग पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ने की आशंका है।
नगर निगम ने बिजली विभाग से आग्रह किया है कि सिठौरा पानी की टंकी और मिनी बाईपास स्थित एमआरएफ सेंटरों पर जल्द से जल्द बिजली कनेक्शन दिया जाए, ताकि इनका संचालन शुरू हो सके और स्वच्छ भारत मिशन की योजना पटरी पर आ सके। नगर निगम के अधिकारियों का कहना है कि यदि जल्द बिजली कनेक्शन नहीं दिया गया तो स्वच्छता प्रबंधन की पूरी व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।