शहर के सीबीगंज-परसाखेड़ा क्षेत्र में प्रस्तावित 1200 एकड़ की बड़ी आवासीय योजना को अब जमीन पर उतारने की तैयारी तेज हो गई है। आवास एवं विकास परिषद ने परियोजना को पहले चरण में चार सेक्टरों में विकसित करने का खाका तैयार कर लिया है।
बरेली। शहर के सीबीगंज-परसाखेड़ा क्षेत्र में प्रस्तावित 1200 एकड़ की बड़ी आवासीय योजना को अब जमीन पर उतारने की तैयारी तेज हो गई है। आवास एवं विकास परिषद ने परियोजना को पहले चरण में चार सेक्टरों में विकसित करने का खाका तैयार कर लिया है। लैंड पूलिंग के तहत सहमति देने वाले 200 किसान-काश्तकारों को भूखंड आवंटित किए जाएंगे, जबकि निजी भूमि विक्रय के लिए सहमति देने वाले करीब 1200 किसानों को मुआवजा दिया जाएगा।
परियोजना को चरणबद्ध तरीके से विकसित किया जाएगा। अधिकारियों के मुताबिक सेक्टर चार, पांच, छह और सात का चिह्नांकन बीते माह ही पूरा कर लिया गया है। अब अगला कदम भूखंड आवंटन और मुआवजा वितरण का है। परिषद का लक्ष्य है कि होली के बाद यह प्रक्रिया औपचारिक रूप से शुरू कर दी जाए।
भूमि खरीद और मुआवजा वितरण के लिए दर तय करने को लेकर प्रशासनिक प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है। अगले एक सप्ताह में जिलाधिकारी की अध्यक्षता में दर निर्धारण समिति गठित की जाएगी। समिति द्वारा दर तय होने के बाद ही आमजन के लिए भूखंडों की बिक्री दर घोषित की जाएगी। रामपुर रोड स्थित सीबीगंज क्षेत्र के ट्यूलिया, हमीरपुर, बोहित, फरीदापुर रामचरण, बल्लिया और मिलक इमामगंज गांवों की लगभग 522 हेक्टेयर भूमि पर इस आवासीय योजना को वर्ष 2011 में शासन से स्वीकृति मिली थी। लंबे समय से विभिन्न कारणों से परियोजना अटकी रही, लेकिन अब विकास में आ रहे अड़ंगे दूर होने के बाद इसे फिर से पटरी पर लाया जा रहा है।
लैंड पूलिंग के तहत सहमति देने वाले किसानों में से पहले चरण में 200 किसानों की सूची शासन को भेजी जा चुकी है। इन किसानों को भूखंड आवंटित किए जाएंगे। वहीं भूमि विक्रय करने वाले करीब 1200 किसानों को मुआवजा वितरण की तैयारी चल रही है। हमीरपुर में 223 किसान, ट्यूलिया में 210, धंतिया में 202 सहित अन्य गांवों में भी एक सैकड़ा से अधिक किसान इस योजना से जुड़े हुए हैं। परिषद द्वारा परिसंपत्तियों का चिह्नांकन कार्य भी पूर्ण कर लिया गया है। परिषद के अधिशासी अभियंता राजेंद्र नाथ राम ने बताया कि किसानों से लगातार समन्वय बनाकर परियोजना को आगे बढ़ाया जा रहा है। उनका कहना है कि प्रयास है कि होली के बाद भूखंड आवंटन और मुआवजा वितरण दोनों प्रक्रियाएं शुरू कर दी जाएं, ताकि वर्षों से लंबित यह योजना अब तेजी से आकार ले सके।