नगर निगम की सफाई व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। मंगलवार रात जब नगर आयुक्त खुद सड़कों पर उतरे तो हकीकत सामने आ गई। डेलापीर से स्टेशन रोड, गांधी उद्यान सहित कई प्रमुख मार्गों पर रात्रिकालीन सफाई पूरी तरह नदारद मिली। न कर्मचारी, न मशीनें, सिर्फ कागजों में चल रही सफाई की पोल खुल गई।
बरेली। नगर निगम की सफाई व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। मंगलवार रात जब नगर आयुक्त खुद सड़कों पर उतरे तो हकीकत सामने आ गई। डेलापीर से स्टेशन रोड, गांधी उद्यान सहित कई प्रमुख मार्गों पर रात्रिकालीन सफाई पूरी तरह नदारद मिली। न कर्मचारी, न मशीनें, सिर्फ कागजों में चल रही सफाई की पोल खुल गई।
इस लापरवाही पर नगर आयुक्त संजीव कुमार मौर्य ने सख्त रुख अपनाते हुए रात्रिकालीन सफाई में लगी फर्मों के चार दिन के मानदेय पर सीधी कैंची चला दी। साथ ही साफ चेतावनी दी गई कि आगे अगर कर्मचारी ड्यूटी से गायब मिले तो फर्मों पर कठोर कार्रवाई तय है। अफसरों को भी नहीं बख्शा गया, नगर स्वास्थ्य अधिकारी और उप नगर स्वास्थ्य अधिकारी को साफ शब्दों में जिम्मेदारी तय करने की चेतावनी दी गई।
मिनी बाईपास रोड पर दिन और रात दोनों समय हुए औचक निरीक्षण में सफाई व्यवस्था पूरी तरह चरमराई मिली। पहले भी चेतावनी दी गई थी, लेकिन सुधार के नाम पर कुछ नहीं हुआ। नतीजा, अब संबंधित फर्म के चार दिन के भुगतान पर रोक लगाने के निर्देश जारी कर दिए गए हैं।
वार्ड नंबर 10 मुंशी नगर में डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन की हकीकत भी चौंकाने वाली है। करीब 3500 घरों में से सिर्फ 1800 घरों तक ही गाड़ी पहुंच रही है। आधा वार्ड भगवान भरोसे पड़ा है। इस गंभीर लापरवाही पर सफाई निरीक्षक राकेश गंगवार का वेतन रोकने के आदेश दिए गए हैं।
नगर निगम क्षेत्र के सार्वजनिक शौचालयों की हालत भी शर्मनाक पाई गई। गंदगी, बदबू और अव्यवस्था पर अफसरों की जमकर क्लास ली गई। सभी संचालकों को एक हफ्ते के भीतर व्यवस्था दुरुस्त करने का अल्टीमेटम दिया गया है। पर्यावरण अभियंता को आदेश दिया गया है कि शौचालयों की अंदर-बाहर की तस्वीरों के साथ पूरी रिपोर्ट तैयार कर पेश करें।