Sawan मास की पुराणों में बहुत अधिक महिमा है। Puran में चार
महीनों को विशेष बताया गया है। यह महीने बैसाख मास, श्रावण मास, कार्तिक
मास एवं माघ मास हैं। सावन का महीना भगवान Shiv को विशेष प्रिय है और शिव
भक्तों को भी Sawan का बेसब्री से इन्तजार रहता है। इस बार सावन में वर्षों
बाद पांच सोमवार पड़ रहे हैं साथ ही इस बार सावन का महीना सोमवार से शुरू
होकर सोमवार को ही समाप्त हो रहा है जिसके कारण ये सावन कुछ विशेष है।
Balaji
Jyotish Sansthan के ज्योतिषाचार्य पण्डित राजीव शर्मा ने बताया कि सावन
का महीना भगवान शिव का प्रिय महीना है और इस बार सावन में कुछ विशेष योग भी
हैं। जैसे श्रावण माह में पांच सोमवार का होना, श्रावण माह का आरम्भ एवं
समापन भी सोमवार को होना, श्रावण माह के दो सोमवार का योग नंदा तिथि में
होना, श्रावण माह का योग जया तिथि में होना, श्रावणी पूर्णिमा पर अंतिम
सोमवार को श्रवण नक्षत्र में चन्द्र ग्रहण का होना, 11 जुलाई को अपरान्ह
03 बजे मंगल का अपनी जलतत्व राशि कर्क में प्रवेश होना जिसके कारण वर्षा की
अधिकता होना, उथल-पथल आदि का होना।
शिव
के इस अत्याधिक प्रिय श्रावण मास में Mahamrityunjay Mantra
शिवसहस्त्रनाम, रूद्राभिषेक, शिवमहिम्न स्त्रोेत, महामृत्युंजय सहस्त्रनाम
आदि मंत्रों का व्यक्ति जितना अधिक जाप कर सके उतना श्रेष्ठ रहता है।
स्कन्द पुराण के अनुसार प्रत्येक दिन एक अध्याय का पाठ करना चाहिए। यह माह
मनोकामनाओं का इच्छित फल प्रदान करने वाला है। नियमपूर्वक शिव पर बिल्ब
पत्र प्रतिदिन निश्चित संख्या (5, 11, 21, 51, 108) में तथा अर्क पुष्प
चढ़ाने का संकल्प लेना चाहिए। इस माह में रूद्राष्टाध्यायी पाठ द्वारा शिव
का पंचामृत से अभिषेक करना चाहिए तथा रूद्रीपाठ द्वारा सहस्त्र धारा से
अभिषेक करना चाहिए। इस माह में मंत्रों षड्अक्षर शिव मंत्र “ऊँ नमः शिवाय”
का पुनःश्चरण भी अति उत्तम है, इस माह में बिल्बवृक्ष तथा कल्पवृक्ष का भी
पूजन करना उत्तम रहता है।
श्रावण मास के
सोमवारों में शिव जी के व्रतों एवं पूजा का विशेष विधान एवं महत्व है। शिव
जी के यह व्रत शुभ फलदायी होते हैं। इस व्रत में भगवान शिव का पूजन करके एक
समय ही भोजन किया जाता है। इस व्रत एवं पूजन में शिव एवं माता पार्वती का
ध्यान कर शिव का पंचाक्षर मंत्र का जाप करते हुये पूजन करना चाहिए। सावन के
प्रत्येक सोमवार को श्री गणेश जी, शिव जी, पार्वती जी तथा नंदी की पूजा
करने का विधान है। शिव जी की पूजा में जल, दूध, दही, चीनी, घी, शहद,
पंचामृत, कलावा, वस्त्र, यज्ञोपवि, चन्दन, रोली, चावल, फूल, बिल्ब पत्र,
दूर्वा, आक, धतूरा, कमलकट्टा, पान, सुपारी, लौंग, इलायची, पंचमेवा, धूप,
दीप, दक्षिणा सहित पूजा करने का विधान है। साथ ही कपूर से आरती करके भजन
कीर्तन और रात्रि जागरण भी करना चाहिए। पूजन के पश्चात् रूद्राभिषेक कराना
चाहिए। ऐसा करने से भोले भगवान शिव शीघ्र ही प्रसन्न होकर सभी मनोकामनायें
पूर्ण करते हैं। सोमवार का व्रत करने से पुत्र, धन, विद्या आदि मनोवांछित
फल की प्राप्ति होती है।