बरेली

सायरन की गूंज से अचानक थम गया शहर… 10 मिनट के ब्लैकआउट में अंधेरे में डूबा पूरा जिला

शुक्रवार शाम ठीक 6 बजे बरेली जिले की रफ्तार अचानक थम गई। सायरन बजते ही शहर की लाइटें एक-एक कर बंद हो गईं और पूरा जिला 10 मिनट के लिए अंधेरे में डूब गया। यूपी दिवस-2026 और नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती के अवसर पर आयोजित ब्लैकआउट मॉकड्रिल के तहत यह अभ्यास कराया गया।

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Jan 23, 2026

बरेली। शुक्रवार शाम ठीक 6 बजे बरेली जिले की रफ्तार अचानक थम गई। सायरन बजते ही शहर की लाइटें एक-एक कर बंद हो गईं और पूरा जिला 10 मिनट के लिए अंधेरे में डूब गया। यूपी दिवस-2026 और नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती के अवसर पर आयोजित ब्लैकआउट मॉकड्रिल के तहत यह अभ्यास कराया गया।

ब्लैकआउट शुरू होते ही कलेक्ट्रेट परिसर, सरकारी कार्यालय, बाजार, रिहायशी इलाके और प्रमुख चौराहे पूरी तरह अंधेरे में चले गए। प्रशासन की निगरानी में हर जगह यह सुनिश्चित किया गया कि किसी भी स्थान से रोशनी बाहर न दिखे। खिड़कियों और दरवाजों को पहले से ही पर्दों और काले कागज से ढक दिया गया था।

सन्नाटा और सायरन, युद्ध जैसे हालात

मॉकड्रिल के दौरान चारों ओर सन्नाटा पसरा रहा। लोगों को घरों में ही रहने के निर्देश दिए गए थे। मोबाइल फ्लैश, टॉर्च, माचिस और धूम्रपान पर पूरी तरह रोक रही। प्रमुख चौराहों पर यातायात रोक दिया गया और पुलिस बल तैनात रहा। सायरन की आवाज ने माहौल को युद्ध जैसी आपात स्थिति में बदल दिया।

प्रशासन और सिविल डिफेंस अलर्ट

सिविल डिफेंस के स्वयंसेवकों ने मौके पर तैनात रहकर स्थिति पर नजर रखी। किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए एंबुलेंस, फायर ब्रिगेड और प्रशासनिक टीमें अलर्ट मोड में रहीं। पूरे अभ्यास के दौरान कोई अव्यवस्था सामने नहीं आई।

डीएम बोले- आपात स्थिति से निपटने की तैयारी जरूरी

जिलाधिकारी अविनाश सिंह ने कहा कि इस तरह के ब्लैकआउट अभ्यास नागरिक सुरक्षा के लिए आवश्यक हैं। उन्होंने बताया कि 10 मिनट के इस अभ्यास से यह परखा गया कि आपात हालात में प्रशासन और आमजन किस तरह प्रतिक्रिया देते हैं। लोगों के सहयोग से मॉकड्रिल सफल रही।

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