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यूपी के इस जिले में बगैर एफआईआर के दबिश देने गई दूसरे जिले की पुलिस, युवक की मौत, इंस्पेक्टर दरोगा समेत चार पुलिस कर्मी सस्पेंड

पुलिस की बड़ी लापरवाही ने एक युवक की जिंदगी छीन ली। बिना मुकदमा दर्ज किए और बिना अफसरों की इजाजत संभल में दबिश देने पहुंची फैजगंज बेहटा थाना पुलिस पर गाज गिर गई है।

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बदायूं। पुलिस की बड़ी लापरवाही ने एक युवक की जिंदगी छीन ली। बिना मुकदमा दर्ज किए और बिना अफसरों की इजाजत संभल में दबिश देने पहुंची फैजगंज बेहटा थाना पुलिस पर गाज गिर गई है। दबिश के दौरान युवक की मौत हो गई, जिसके बाद थानाध्यक्ष समेत चार पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया।

चार फरवरी को फैजगंज बेहटा क्षेत्र की एक महिला ने थाने में तहरीर दी थी। आरोप था कि उसकी बेटी को एक युवक बहला-फुसलाकर ले गया है। लेकिन हैरानी की बात यह रही कि थानाध्यक्ष ने इस मामले में मुकदमा तक दर्ज नहीं किया। न एफआईआर, न डायरी एंट्री, सीधे टीम रवाना कर दी और यही पहली और सबसे बड़ी चूक साबित हुई।

बिना अनुमति संभल में रेड, नियमों को दिखाया ठेंगा

बताया जा रहा है कि थानाध्यक्ष राजकुमार सिंह ने दारोगा मामराज सिंह, दारोगा लियाकत अली और मुख्य आरक्षी संजय कुमार को युवक की तलाश में संभल जिले भेज दिया। न तो उच्चाधिकारियों से अनुमति ली गई, न स्थानीय थाने को विधिवत सूचना दी गई। लोकेशन के आधार पर टीम संभल के कैलादेवी थाना क्षेत्र के गांव नारंगपुर पहुंची, जहां युवक हरचरन अपनी ससुराल में था।

पुलिस पहुंची तो भागा युवक, कुछ देर बाद जमीन पर गिरा

दबिश के दौरान हरचरन भागने लगा। पुलिस टीम ने पीछा किया। इसी दौरान वह अचानक गिर पड़ा और उसकी मौत हो गई। प्राथमिक तौर पर हार्ट अटैक बताया गया, लेकिन घटना ने परिजनों और ग्रामीणों को भड़का दिया। सवाल यह उठा कि आखिर बिना मुकदमे के पुलिस पहुंची ही क्यों।

जांच में खुली परत-दर-परत लापरवाही

मामले की शिकायत उच्चाधिकारियों से हुई तो जांच बैठा दी गई। जांच में साफ हुआ कि कोई मुकदमा दर्ज नहीं था, दबिश की आधिकारिक रवानगी दर्ज नहीं थी और न ही वरिष्ठ अधिकारियों से अनुमति नहीं ली गई थी मामला तूल पकड़ता देख गुरुवार देर रात एसएसपी डॉ. बृजेश कुमार सिंह ने थानाध्यक्ष राजकुमार सिंह, दारोगा मामराज सिंह, दारोगा लियाकत अली और मुख्य आरक्षी संजय कुमार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। सहसवान सीओ को पूरे प्रकरण की जांच सौंपी गई है।

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