शहर की ट्रैफिक व्यवस्था सुधारने और मुख्य मार्गों को आधुनिक रूप देने की दिशा में नगर निगम ने बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री ग्रीन रोड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट स्कीम (सीएम ग्रिड योजना) के तीसरे चरण में अब महर्षि चौक से श्यामगंज पुल तक करीब डेढ़ किलोमीटर लंबी सड़क को 36 करोड़ रुपये की लागत से विकसित किया जाएगा।
बरेली। शहर की ट्रैफिक व्यवस्था सुधारने और मुख्य मार्गों को आधुनिक रूप देने की दिशा में नगर निगम ने बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री ग्रीन रोड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट स्कीम (सीएम ग्रिड योजना) के तीसरे चरण में अब महर्षि चौक से श्यामगंज पुल तक करीब डेढ़ किलोमीटर लंबी सड़क को 36 करोड़ रुपये की लागत से विकसित किया जाएगा। परियोजना का प्रस्ताव शासन को भेज दिया गया है और स्वीकृति मिलते ही निर्माण कार्य शुरू होगा।
परियोजना की जानकारी देते हुए एक्सईएन राजीव राठी ने बताया कि सड़क को आधुनिक मानकों के अनुरूप तैयार किया जाएगा। वर्तमान में सड़क के बीच स्थित डिवाइडर की चौड़ाई लगभग 0.7 मीटर है, जिसे बढ़ाकर 1.2 मीटर किया जाएगा। इससे सड़क का स्वरूप अधिक आकर्षक होगा और यातायात संचालन भी सुरक्षित व सुव्यवस्थित बनेगा।
इस परियोजना के तहत बिजली की सभी लाइनों को भूमिगत किया जाएगा। इससे वर्षों से सड़कों के ऊपर फैले तारों के जाल से मुक्ति मिलेगी और दुर्घटनाओं की आशंका भी कम होगी। दोनों ओर मजबूत और समतल फुटपाथ बनाए जाएंगे, जिससे पैदल चलने वाले लोगों को सुरक्षित आवागमन की सुविधा मिल सके। साथ ही डिवाइडर और किनारों पर पौधारोपण कर मार्ग को हरित और सुंदर बनाया जाएगा। नगर निगम का दावा है कि इस मार्ग पर वर्तमान में यातायात का दबाव काफी अधिक रहता है। नई सड़क, चौड़े डिवाइडर और बेहतर ट्रैफिक प्रबंधन से जाम की समस्या में राहत मिलेगी। इससे आसपास के व्यापारियों और स्थानीय निवासियों को सीधा लाभ मिलेगा।
सीएम ग्रिड योजना के दूसरे चरण में स्टेडियम रोड पर डेलापीर से स्टेडियम तक निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है। एक ओर का कार्य पूरा हो चुका है, जबकि दूसरी ओर का काम शीघ्र पूर्ण होने की संभावना है। प्रेमनगर क्षेत्र में भी विकास कार्य प्रगति पर हैं। नगर आयुक्त संजीव मौर्य ने बताया कि तीसरे चरण की डीपीआर शासन को भेज दी गई है। स्वीकृति मिलते ही कार्य प्रारंभ कराया जाएगा और पूर्व स्वीकृत परियोजनाओं को भी तेजी से पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। शहर की प्रमुख सड़कों के इस कायाकल्प से बरेली को आधुनिक और व्यवस्थित यातायात तंत्र की ओर एक मजबूत कदम माना जा रहा है।