खुशियों से भरे घर में अचानक मातम पसर गया। बेटी की डोली उठने से पहले ही मां की सांसें थम गईं। घर के एक कमरे में मां का शव रखा था और दरवाजे पर बेटी की बरात खड़ी थी।
बरेली। खुशियों से भरे घर में अचानक मातम पसर गया। बेटी की डोली उठने से पहले ही मां की सांसें थम गईं। घर के एक कमरे में मां का शव रखा था और दरवाजे पर बेटी की बरात खड़ी थी। दिल दहला देने वाले इस मंजर में परिजनों ने आंसू रोककर पहले बेटी की शादी की रस्में पूरी कीं और बरात विदा होने के बाद मां का अंतिम संस्कार करने का फैसला लिया।
बहेड़ी के मोहल्ला आजाद नगर निवासी प्रवीण कुमार सक्सेना की बेटी श्रद्धा का विवाह सोमवार को महराजगंज (गोरखपुर) निवासी प्रिकेश सक्सेना के साथ तय था। दोपहर के समय करीब 600 किलोमीटर दूर से बरात धूमधाम के साथ पहुंची। घर के बाहर स्वागत की तैयारियां चल रही थीं और रिश्तेदार बरातियों के सत्कार में जुटे थे। इसी दौरान अचानक दुल्हन की मां रजनी की तबीयत बिगड़ गई और देखते ही देखते उनकी सांसें थम गईं। बरात के स्वागत के बीच आई इस खबर ने पूरे परिवार और मोहल्ले को स्तब्ध कर दिया।
अचानक हुए इस हादसे के बाद कुछ देर तक घर में अफरा-तफरी का माहौल रहा। किसी को समझ नहीं आ रहा था कि इस मुश्किल घड़ी में क्या किया जाए। एक तरफ बेटी की शादी की रस्में थीं और दूसरी तरफ मां का पार्थिव शरीर घर में पड़ा था।परिजनों और रिश्तेदारों ने आपस में सलाह करके फैसला किया कि बरात इतनी दूर से आई है, इसलिए पहले बेटी की शादी की रस्में पूरी की जाएं। इसके बाद रजनी का शव घर के अंदर ही रखा गया और बाहर शादी की रस्में शुरू कर दी गईं। परिवार के लोगों ने भारी मन से कन्यादान और अन्य रस्में पूरी कराईं। बरात की विदाई के बाद ही अंतिम संस्कार करने का निर्णय लिया गया।
इस दर्दनाक घटना की खबर फैलते ही पूरे मोहल्ले में सन्नाटा छा गया। लोग इस दृश्य को देखकर भावुक हो उठे। एक ही घर में शादी की रस्में और मातम का माहौल देखकर हर किसी की आंखें नम हो गईं। कई लोगों ने कहा कि यह शायद जिंदगी की सबसे कठिन घड़ी थी, जब परिजनों को दिल पर पत्थर रखकर बेटी की खुशियों के लिए अपने दुख को दबाना पड़ा।