2 मई 2026,

शनिवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

नमाज पर हाईकोर्ट के फैसले को मौलाना का समर्थन, बोले- शरीयत भी कहती है विवाद वाली जगहों से बचो

ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना मुफ्ती शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने सार्वजनिक स्थानों पर नमाज को लेकर आए इलाहाबाद हाईकोर्ट के हालिया फैसले का समर्थन किया है। उन्होंने साफ कहा कि कोर्ट का निर्णय न सिर्फ कानूनी बल्कि शरीयत के नजरिये से भी बिल्कुल दुरुस्त है।

2 min read
Google source verification

मौलाना शहाबुद्दीन

बरेली। ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना मुफ्ती शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने सार्वजनिक स्थानों पर नमाज को लेकर आए इलाहाबाद हाईकोर्ट के हालिया फैसले का समर्थन किया है। उन्होंने साफ कहा कि कोर्ट का निर्णय न सिर्फ कानूनी बल्कि शरीयत के नजरिये से भी बिल्कुल दुरुस्त है।

शनिवार को जारी बयान में मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने कहा कि इस्लाम अमन और भाईचारे का पैगाम देता है। यदि किसी स्थान पर नमाज पढ़ने से विवाद की स्थिति बनती हो या किसी को आपत्ति हो सकती हो, तो वहां नमाज अदा करने से बचना चाहिए। उन्होंने कहा कि धार्मिक आस्था के साथ-साथ सामाजिक सौहार्द बनाए रखना भी उतना ही जरूरी है।

हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी, सार्वजनिक स्थान सबके लिए

दरअसल, इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने सार्वजनिक स्थानों पर नमाज को लेकर सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि सार्वजनिक स्थल किसी एक समुदाय के लिए नहीं होते। अदालत ने स्पष्ट किया कि धार्मिक स्वतंत्रता के नाम पर सार्वजनिक भूमि पर स्थायी या नियमित कब्जा नहीं किया जा सकता। यह सभी नागरिकों के लिए समान रूप से उपलब्ध है और कानून द्वारा नियंत्रित होती है। यह टिप्पणी संभल से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान आई। अदालत ने निजी परिसर के आबादी भूमि हिस्से में नमाज की अनुमति मांगने वाली याचिका को खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि ऐसे उपयोग से आम लोगों के आवागमन और सुरक्षा पर असर पड़ता है, इसलिए राज्य की जिम्मेदारी है कि सार्वजनिक स्थलों पर सभी की बराबर पहुंच सुनिश्चित करे।

चरित्र प्रमाण पत्र पर भी हाईकोर्ट का बड़ा आदेश

इसी बीच इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने एक अन्य अहम आदेश में कहा कि केवल आपराधिक मामला लंबित होने के आधार पर किसी का चरित्र प्रमाण पत्र नहीं रोका जा सकता। न्यायमूर्ति अरिंदम सिन्हा और सत्यवीर सिंह की खंडपीठ ने पुलिस प्रशासन को निर्देश दिया कि शासन के नवीनतम दिशा-निर्देशों के अनुसार याची को प्रमाण पत्र जारी किया जाए। यह आदेश नीतीश कुमार की याचिका पर सुनवाई के बाद दिया गया, जिसमें एडीजी द्वारा लंबित आपराधिक मामले के आधार पर चरित्र प्रमाण पत्र निरस्त कर दिया गया था। हाईकोर्ट ने इसे गलत ठहराते हुए साफ किया कि जब तक दोष सिद्ध न हो, केवल केस लंबित होने से अधिकार नहीं छीने जा सकते।

बड़ी खबरें

View All

बरेली

उत्तर प्रदेश

ट्रेंडिंग