सऊदी अरब में उमरा के लिए गए काजी-ए-हिंदुस्तान (ग्रैंड मुफ्ती ऑफ इंडिया) और दरगाह आला हजरत से जुड़े उलेमा को लेकर सोशल मीडिया पर फैली हिरासत की खबर मंगलवार को अफवाह साबित हुई।
बरेली। सऊदी अरब में उमरा के लिए गए काजी-ए-हिंदुस्तान (ग्रैंड मुफ्ती ऑफ इंडिया) और दरगाह आला हजरत से जुड़े उलेमा को लेकर सोशल मीडिया पर फैली हिरासत की खबर मंगलवार को अफवाह साबित हुई। दरअसल रियाद के एक रेस्टोरेंट में इफ्तार के दौरान बड़ी संख्या में अकीदतमंदों के जुटने के कारण सुरक्षा एजेंसियों ने एहतियातन कुछ लोगों से पूछताछ की थी, जिसे सोशल मीडिया पर गलत तरीके से हिरासत बताकर वायरल कर दिया गया।
जानकारी के अनुसार उमरा के लिए सऊदी अरब पहुंचे उलेमा और जायरीन ने रियाद के एक रेस्टोरेंट में इफ्तार के बाद मुलाकात और भोजन का कार्यक्रम रखा था। इस दौरान बड़ी संख्या में अकीदतमंद वहां पहुंच गए, जिससे रेस्टोरेंट में भीड़ बढ़ गई। सऊदी अरब में इन दिनों सुरक्षा कारणों से भीड़ जुटाने पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है। सूचना मिलने पर सऊदी पुलिस मौके पर पहुंची और सीसीटीवी फुटेज देखने के बाद वहां मौजूद कुछ लोगों से पूछताछ की।
बताया जा रहा है कि कार्यक्रम में बरेली, रामपुर और मुरादाबाद सहित उत्तर प्रदेश के कई शहरों से उमरा करने पहुंचे जायरीन मौजूद थे। इसके अलावा मुंबई और महाराष्ट्र के अन्य इलाकों से आए अकीदतमंद भी रेस्टोरेंट में मौजूद थे। भीड़ अधिक होने के कारण सुरक्षा एजेंसियों ने स्थिति को लेकर एहतियाती जांच की।
जमात रज़ा-ए मुस्तफा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और ग्रैंड मुफ्ती ऑफ इंडिया के दामाद सलमान हसन खां (सलमान मियां) ने स्पष्ट किया कि सोशल मीडिया पर फैलाई जा रही हिरासत की खबर पूरी तरह गलत है। उन्होंने बताया कि उलेमा इफ्तार के बाद भोजन के लिए रेस्टोरेंट गए थे, जहां अकीदतमंदों की भीड़ जमा हो गई थी। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण सऊदी सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हैं, इसलिए वहां मौजूद कुछ लोगों से सामान्य पूछताछ की गई थी।
सलमान मियां के अनुसार ग्रैंड मुफ्ती ऑफ इंडिया और अन्य उलेमा की रियाद से मदीना शरीफ के लिए फ्लाइट निर्धारित है। तय कार्यक्रम के अनुसार उमरा की यात्रा पूरी करने के बाद सभी उलेमा 15 मार्च को भारत लौटेंगे। सोशल मीडिया पर खबर वायरल होने के बाद देशभर में अकीदतमंदों के बीच चिंता फैल गई थी। कई लोग फोन कर उलेमा की खैरियत पूछते रहे। बाद में दरगाह से बयान जारी होने के बाद स्थिति स्पष्ट हुई और लोगों ने राहत की सांस ली। धार्मिक संगठनों ने लोगों से अपील की है कि बिना पुष्टि के सोशल मीडिया पर वायरल हो रही खबरों पर विश्वास न करें और अफवाह फैलाने से बचें।