
दलपत धतरवाल
बालोतरा.
कठै घी घणा तो कठै मुट्ठी चणा..। बॉर्डर के विद्यालय शिक्षकों को तरस रहे है आर सुविधाजनक जगहों पर शिक्षकों को उनकी सहूलियत मुताबिक लगाने का शिक्षा विभाग का खेल थमने का नाम नहीं ले रहा है। शाला दर्पण और काउंसलिंग को धत्ता बताकर विभागीय कार्मिक अपनों के लिए यह कार्य कर रहे हैं। पचपदरा साल्ट के एक स्कूल की यही स्थिति है। पचपदरा कस्बे से 7 किलोमीटर दूर स्थित राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय पचपदरा साल्ट में 28 विद्यार्थियों का नामांकन है। दोपहर 12.15 बजे पत्रिका टीम स्कूल पहुंची तो स्कूल के बरामदे में दो शिक्षकों की मोटरसाइकिलें खड़ी थी। एक कमरे में तीन विद्यार्थी बैठे थे। कार्यालय में संस्था प्रधान व एक अन्य शिक्षक बातों में मशगूल थे। कुछ समय बाद स्कूल के पास स्थित एक मंदिर से 4-5 विद्यार्थी व एक शिक्षाकर्मी भी आए।
विद्यार्थी नहीं, शिक्षकों के लिए विद्यालय
नमक उत्पादन क्षेत्र में लवण विभाग ने सन् 1937 में अंग्रेजों के समय स्कूल प्रारंभ किया था। इसके बाद इस स्कूल भवन को शिक्षा विभाग को सुपुर्द कर दिया था। स्कूल के आसपास नमक उत्पादक समाज के लोग रहते थे। सन् 1979 में क्षेत्र में बाढ़ आने से विद्यालय के आसपास की बस्ती उजड़ गई। इसके बाद यहां से लोग पलायन कर पचपदरा कस्बे में चले गए। विद्यालय के चार किलोमीटर की परिधि में कोईभी रहवासी ढ़ाणी नहीं है। पूरा इलाका वीरान है। यहां करीब तीन-चार किलोमीटर दूर ढ़ाणियों से विद्यार्थी आते हैं।
गलत है- एक तरफ कई विद्यालय शिक्षकों की कमी झेल रहे हैं तो दूसरी ओर इस विद्यालय में चंद विद्यार्थियों पर तीन शिक्षक को लगा रखा है। यह गलत है। उचित कार्रवाई जरूरी है।- कांतिलाल व्यास, जिलाध्यक्ष राजस्थान शिक्षक संघ राष्ट्रीय
साहब,बोले सब ठीक
विद्यालय में नामांकन 28 है, कम क्यूं है इसका मुझे खुद को पता नही है। नामांकन से कम बच्चे उपस्थित थे, तो पता करवाएंगे। शिक्षकों की नियुक्ति नियमानुसार सही है। - मगाराम पूनिया, ब्लॉक प्रारंभिक शिक्षा अधिकारी पाटोदी