
8 डिग्री तापमान, 125 मरीज ठिुठर रहे, 300 बेड का जिला अस्पताल शर्मसार
बाड़मेर . बीमार के पास ओढऩे को एक कंबल न हो और 8 डिग्री तापमान में ठिठुरे और वो भी सरकारी जिला अस्पताल में तो इससे शर्मनाक हालत क्या होंगे? 300 मरीजों के इस अस्पताल में 225 बेड हंै। अभी 125 से अधिक मरीज दाखिल हंै और इनको मुहैया करवाने के लिए एक-एक कंबल नहीं है।
अस्पताल में महज 50-60 कंबल ही उपलब्ध हैं। यहां 8 डिग्री तापमान में एक मरीज को कम से कम दो कंबल की जरूरत है। मजबूरी में परिजन अस्पताल में मरीज के दाखिल होते ही गुदड़ी- रजाई की 'भारीÓ साथ उठाकर आ रहे हंै। मरीजों के लिए तो यह परेशानी भरा है ही अस्पताल के लिए भी शर्मलायक हालात हैं। अस्पताल प्रबंधन का दावा है कि उन्होंने अब कंबल के लिए मांग भेज दी है। पिछले साल भी एेसे ही हालात होने पर पत्रिका की पहल पर अस्पताल को कंबल उपलब्ध हुए थे।
मांगने पर मिलता है
कुछ वार्डों में कंबल उपलब्ध हैं। लेकिन सभी वार्डों में ऐसा नहीं है। कई वार्ड में देखा तो पता चला कि यहां मांगने पर कंबल मिलता है। लेकिन पर्याप्त कंबल एक वार्ड को छोड़कर कहीं नजर नहीं आए।
होती है एंट्री
मरीज को कंबल इश्यू किया जाता है। नर्सिंग कार्मिकों का कहना है कि कई बार मरीज कंबल साथ लेकर चले जाते हैं। यह बड़ी समस्या है। इसलिए मरीज को कंबल देने और लेने का रजिस्टर में इंद्राज किया जाता है।
पत्रिका व्यू
बाड़मेर जिला अस्पताल मेडिकल कॉलेज से संलग्न हो चुका है। सर्दी हर बार आती है, यह तय है। लिहाजा यह अक्टूबर में ही तय होना था कि कंबलों की जरूरत पड़ेगी। स्टोर कीपर की मांग पर अस्पताल प्रबंधन, मेडिकल रिलीफ सोसायटी या अन्य किसी माध्यम से यह व्यवस्था होनी चाहिए। आग लगने पर कुआं खोदने की यह स्थिति ठीक नहीं है। मरीज के साथ कंबल ले जाने का आरोप लगाया जा रहा है तो गलत है। यह जिम्मेदारी भी अस्पताल प्रबंधन की है कि वह एेसी व्यवस्था करे कि मरीज के आते और जाते वक्त पूरी तसल्ली कर ले। इन सर्दियों में मरीजों के पास दो-दो कंबल उपलब्ध करवाने की जिम्मेदारी 24 घंटे में पूरी होनी चाहिए।
परिजन यों बोले
यहां जब मरीज को भी कंबल नहीं मिलता है तो परिजन की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है। हम घर से रजाई लेकर आए हैं। रामकुमार
अस्पताल में यह हालात हमेशा रहते हैं। यहां सर्दी में मरीजों तक को कंबल नहीं मिलते हैं। जबकि व्यवस्था तो यह भी होनी चाहिए कि साथ आने वाले एक व्यक्ति को भी ओढऩे और बिछाने के लिए बिस्तर- कंबल उपलब्ध करवाएं। लेकिन यहां हालात यह है कि मरीज के परिजन गर्मी में घर से पंखा लेकर आते हैं और सर्दी में रजाई लानी पड़ रही है। -रामाराम चौधरी
हमने मांग भेज दी
&वास्तव में कंबल कम हंै। इसके लिए मांग भेज दी गई है। कोई संस्था मदद करती है तो भी स्वागत है। कम से कम दो कंबल तो इस सर्दी में मरीज को चाहिए हीं। इसके लिए इंतजाम को प्रयासरत हैं।
- डॉ. बीएल मंसूरिया, पीएमओ, राजकीय जिला अस्पताल, बाड़मेर