बाड़मेर

जवानों को नहीं देखनी पड़ेगी कैमरा स्क्रीन! बालोतरा के युवाओं ने खोज निकाला AI फॉर्मूला, अब संदिग्धों का बचना मुश्किल

बालोतरा के दो युवाओं ने AI से लैस स्मार्ट सुरक्षा मॉडल बनाया है। यह मौजूदा CCTV कैमरों की मदद से संदिग्ध गतिविधियों की पहचान कर अलर्ट देने में मदद करेगा। उनका शोधपत्र तुर्की के अंतरराष्ट्रीय IEEE सम्मेलन में प्रस्तुत होगा।
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Oct 19, 2026
balotra two friends
कृष चारण और गौरव वैष्णव (Photo-Patrika)

बालोतरा. सीमा पर लगे कैमरे अब केवल घटनाओं की रिकॉर्डिंग तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि संदिग्ध गतिविधियों की पहचान कर सुरक्षा बलों को सतर्क करने में भी मदद कर सकेंगे। बालोतरा जिले के दो विद्यार्थियों कृष चारण भांडियावास और गौरव वैष्णव आसोतरा ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआइ) आधारित ऐसा सॉफ्टवेयर मॉडल तैयार किया है, जो मौजूदा सीसीटीवी कैमरों को ही स्मार्ट बनाने की क्षमता रखता है। खास बात यह है कि इसके लिए नए या महंगे उपकरण लगाने की जरूरत नहीं होगी। दोनों का शोधपत्र तुर्की में होने वाले अंतरराष्ट्रीय आईईईई सम्मेलन में प्रस्तुति के लिए चयनित हुआ है।

कैमरे की निगरानी, तकनीक की नजर

आईसीएफएआई यूनिवर्सिटी जयपुर में अध्ययनरत बचपन के दोनों दोस्तों ने इस मॉडल को आइबीवीएपी (इंटेलिजेंट बॉर्डर वीडियो एनालिटिक्स प्लेटफॉर्म) नाम दिया है। सामान्यतः सीमा क्षेत्रों में लगे कैमरे केवल दृश्य रिकॉर्ड करते हैं और जवानों को लगातार स्क्रीन पर नजर रखनी पड़ती है। यह मॉडल कैमरों से मिलने वाले दृश्यों का वास्तविक समय में विश्लेषण कर चेहरे की पहचान, वाहनों की नंबर प्लेट पढ़ने, व्यक्ति की मौजूदगी पहचानने और उसकी गतिविधियों पर नजर रखने जैसी सुविधाएं देता है। संदिग्ध गतिविधि होने पर यह जवानों को सतर्क करने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। इसकी एक प्रमुख विशेषता यह है कि यह पूरी तरह बिना इंटरनेट के काम कर सकता है। इसके लिए बादल आधारित व्यवस्था की जरूरत नहीं होगी, जिससे संवेदनशील जानकारी के बाहर जाने का जोखिम कम करने में मदद मिल सकती है।

बचपन की दोस्ती, तकनीक में साझेदारी

कृष चारण एमसीए प्रथम सेमेस्टर के विद्यार्थी हैं, जबकि गौरव वैष्णव कंप्यूटर विज्ञान में बीटेक तृतीय वर्ष में पढ़ रहे हैं। कृष ने बताया कि दोनों ऐसा समाधान बनाना चाहते थे, जो वास्तविक जरूरत में काम आए। सीमा पर जवानों को लंबे समय तक स्क्रीन देखने की परेशानी को समझते हुए उन्होंने ऐसी तकनीक विकसित करने की सोची, जो संदिग्ध गतिविधि पर ही अलर्ट दे। गौरव ने कहा कि तुर्की के अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में शोधपत्र चयनित होना उनके लिए सपने जैसा है। दोनों का शोधपत्र आईईईई हैक रिसर्च कॉन्फ्रेंस में प्रकाशित हुआ है। वहीं हाल ही में आईईईई स्किट की ओर से आयोजित इग्नाइट हैकाथॉन में विजेता रहने पर उन्हें 35 हजार रुपए का चेक देकर प्रोत्साहित किया गया।

Updated on:
19 Oct 2026 09:23 am
Published on:
19 Oct 2026 09:23 am