सुरताराम दिहाड़ी मजदूरी कर परिवार का पेट पालता था, अब उसकी मौत पर पत्नी लीलादेवी पर तीनों बच्चों के लालन-पालन की जिम्मेदारी आ गई है। सुरताराम के माता-पिता की मौत हो चुकी थी।
बाड़मेर/धोरीमन्ना। नेहरों का तला नोखड़ा निवासी सुरताराम मेघवाल मेहनत मजदूरी कर अपने परिवार का पेट पालता था। दिहाड़ी मजदूरी से उसके घर का दो वक्त का चूल्हा जलता था, लेकिन चार दिन पहले मकान का कार्य करते वक्त नीचे गिरने से उसकी मौत हो गई।
उसकी मौत से एक तरफ जहां परिवार का कमाऊ पूत चला गया तो दूसरी ओर उसकी पत्नी को अब यह चिंता है कि वह अपने तीन मासूमों का पेट कैसे पालेगी।
सुरताराम दिहाड़ी मजदूरी कर परिवार का पेट पालता था, अब उसकी मौत पर पत्नी लीलादेवी पर तीनों बच्चों के लालन-पालन की जिम्मेदारी आ गई है। सुरताराम के माता-पिता की मौत हो चुकी थी। परिवार में कमाने वाला सुरताराम अकेला ही था।
सुरताराम की मौत से तीन मासूमों के सिर से पिता का साया उठ गया। सुरताराम की बड़ी बेटी केसी छह साल की है, जबकि कृष्णा चार वर्ष की। सुरताराम का इकलौता बेटा विक्रम दो साल का है।
सुरताराम के परिवार को अब मदद की दरकार है। ऐसे में सरकार व किसी सामाजिक स्तर पर सहायता मिले तो ही परिवार की रोटी की चिंता मिटे। कोई सामाजिक संगठन आगे आकर आर्थिक मदद करते हैं तो आहत परिवार को राहत मिलेगी।