
Raksha Bandhan Special : राखी के धागे में बंधा भाई-बहन का रिश्ता आखिर कितना मजबूत होता है, इसकी मिसाल बालोतरा के पाटोदी क्षेत्र की ग्राम पंचायत केसरपुरा में देखने को मिली। रक्षाबंधन पर जहां बहनें भाई की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधकर सुरक्षा का वचन लेती हैं, वहीं 34 वर्षीय अमजद खान ने अपनी छोटी बहन अमीना की जिंदगी बचाने के लिए उसे अपनी एक किडनी ही दे दी। कमठा मजदूरी करने वाले अमजद ने युवावस्था की परवाह किए बिना बहन के लिए यह बड़ा फैसला लिया। अहमदाबाद के निजी अस्पताल में किडनी ट्रांसप्लांट के बाद अब भाई-बहन दोनों स्वस्थ हैं और चिकित्सकों की सलाह पर घर पर आराम कर रहे हैं। अमजद ने बताया कि वे हर साल रक्षाबंधन पर बहन अमीना से राखी बंधाकर उसके स्वस्थ और सुखी जीवन की कामना करते है।
अमजद कमठा मजदूरी कर परिवार चलाते हैं। किडनी दान करने के बाद चिकित्सकों की सलाह पर फिलहाल घर पर आराम कर रहे हैं। पिता भी दैनिक मजदूरी करते हैं। तीनों भाई अलग-अलग रहते हैं। अमीना का ससुराल मीरपुरा है और उसका एक छोटा बेटा भी है। मजदूर परिवार की आर्थिक स्थिति को देखते हुए अमीना के ससुराल पक्ष ने उपचार में करीब 8 से 10 लाख रुपए लगाकर अपनी बहू का इलाज करवाया।
राखी का पर्व भाई की रक्षा के संकल्प का प्रतीक है, लेकिन अमजद ने इस रिश्ते को एक कदम आगे बढ़ाकर बहन को जिंदगी का तोहफा दिया। क्षेत्र में उसके इस त्याग की चर्चा है और लोगों की जुबान पर एक ही बात है कि भाई हो तो ऐसा। वहीं अमजद के परिवार ने सरकार से आर्थिक सहायता एवं सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने की मांग की है।
26 वर्षीय अमीना की दोनों किडनियां खराब होने के बाद वर्ष 2019 से उपचार चल रहा था। लंबे समय तक जोधपुर के अस्पताल में इलाज के साथ उसे डायलिसिस कराना पड़ता था। चिकित्सकों ने जब बताया कि अब अधिक समय तक डायलिसिस संभव नहीं है और किडनी ट्रांसप्लांट करना पड़ेगा, तो परिवार के सामने सबसे बड़ी चुनौती उपयुक्त किडनी डोनर की थी।
अमीना तीन भाइयों में सबसे छोटी बहन है। सबसे बड़े भाई साबीर की जन्म से ही एक किडनी है। दूसरे भाई फारुख को बीपी की समस्या होने के कारण वे किडनी दान नहीं कर सकते थे। ऐसे में छोटे भाई अमजद ने बहन के लिए किडनी देने की जिम्मेदारी अपने कंधों पर उठा ली। अहमदाबाद के निजी अस्पताल में आवश्यक उपचार के बाद दोनों की किडनी का ट्रांसप्लांट किया गया।