बाड़मेर

Success Story: शादी के बाद बदली किस्मत, 948वीं रैंक से दिनेश बिश्नोई बने RAS टॉपर, पत्नी बनीं सफलता की वजह

Success Story: बाड़मेर के छोटे से गांव भलीसर में जन्मे दिनेश बिश्नोई ने साबित कर दिया कि हालात चाहे जैसे भी हों, अगर इरादे मजबूत हों तो सफलता कदम चूमती है। कभी 948वीं रैंक पर रुक जाने वाला यह सफर, आज RAS-2024 टॉपर बनने तक पहुंच चुका है। इस सफलता में परिवार का साथ, खासकर पत्नी और नन्ही बेटी की प्रेरणा उनकी सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरी।

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Apr 19, 2026
दिनेश बिश्नोई, उनकी पत्नी और बेटी (फोटो-पत्रिका)

बाड़मेर। राजस्थान के रेतीले क्षेत्र से उठी एक कहानी इन दिनों पूरे प्रदेश में प्रेरणा का स्रोत बनी हुई है। जिले के धोरीमन्ना क्षेत्र के भलीसर गांव निवासी दिनेश बिश्नोई ने राजस्थान प्रशासनिक सेवा (RAS-2024) में प्रथम स्थान हासिल कर यह साबित कर दिया कि संघर्ष, धैर्य और सही सहयोग मिल जाए तो मंजिल दूर नहीं रहती। उनकी यह यात्रा केवल एक परीक्षा में सफलता की कहानी नहीं, बल्कि जीवन के उतार-चढ़ावों से जूझकर खुद को निखारने की मिसाल है।

दिनेश ने वर्ष 2021 में पहली बार RAS परीक्षा दी थी। उस समय उन्हें 948वीं रैंक मिली, जो उनके लक्ष्य से काफी दूर थी। लेकिन उन्होंने इस परिणाम को असफलता मानने के बजाय सीख के रूप में लिया। यही सोच उनके सफर का टर्निंग प्वाइंट बनी। उन्होंने अपनी कमजोरियों को पहचाना, रणनीति बदली और तैयारी को नए सिरे से मजबूत किया।

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दिनेश बिश्नोई की पत्नी-बेटी और मां-पिता (फोटो-पत्रिका)

पत्नी प्रियंका ने किया पूरा सहयोग

इसी दौरान उनकी शादी प्रियंका से हुई, जिसने उनके जीवन में एक सकारात्मक बदलाव लाया। परिवार के अनुसार, शादी के बाद दिनेश पहले से अधिक जिम्मेदार और गंभीर हो गए। उनकी पत्नी प्रियंका ने उन्हें पूरा सहयोग दिया। उन्होंने कभी भी पढ़ाई में बाधा नहीं बनने दिया, बल्कि उन्हें मानसिक रूप से मजबूत बनाए रखा। प्रियंका का यह कहना कि 'मैंने उन्हें कभी डिस्टर्ब नहीं किया,' उनके रिश्ते की समझ और सहयोग को दर्शाता है।

बेटी से मिली नई ऊर्जा

दिनेश की सफलता में उनकी छोटी बेटी का भी खास योगदान रहा। बेटी के जन्म ने उन्हें नई ऊर्जा और प्रेरणा दी। परिवार के इस भावनात्मक सहारे ने उनके आत्मविश्वास को और मजबूत किया। उनके पिता रामधन बिश्नोई भी मानते हैं कि बेटे की इस सफलता में परिवार का सकारात्मक माहौल और बहन सुमित का लगातार मोटिवेशन अहम रहा।

दिनेश ने ऐसे की तैयारी

राजस्थन पत्रिका से बातचीत में दिनेश ने बताया कि पढ़ाई के दौरान मैंने कोई कठोर टाइम-टेबल नहीं अपनाया, बल्कि समय के अनुसार पढ़ाई की। उन्होंने सिलेबस को छोटे-छोटे हिस्सों में बांटकर नियमित रिवीजन पर जोर दिया। लगभग 90 प्रतिशत तैयारी उन्होंने सेल्फ स्टडी के जरिए की। साथ ही, पटवारी, ग्राम सेवक और सब-इंस्पेक्टर जैसी परीक्षाओं में सफलता हासिल करते हुए उन्होंने अपने अनुभव को और समृद्ध किया। वर्ष 2023 में उन्हें RPS कैडर भी मिला, जो उनके आत्मविश्वास को और बढ़ाने वाला साबित हुआ।

दिनेश बिश्नोई की सफलता के बाद घर में उत्साह (फोटो-पत्रिका)

इटरविव के लिए करंट अफेयर्स पर किया फोकस

प्री परीक्षा में उन्होंने ऑब्जेक्टिव प्रश्नों और करंट अफेयर्स पर फोकस किया, जबकि मेन्स में उत्तर लेखन का विशेष अभ्यास किया। इंटरव्यू के लिए उन्होंने व्यक्तित्व विकास और समसामयिक मुद्दों पर गहराई से काम किया। उनकी मेहनत का परिणाम यह रहा कि उन्होंने मेन्स में 302.50 अंक और इंटरव्यू में 49 अंक हासिल कर कुल 351.50 अंकों के साथ प्रदेश में टॉप किया।

ग्रामीण परिवेश नहीं बना बाधा

दिनेश की यह कहानी इस बात का प्रमाण है कि बड़े शहरों या महंगी कोचिंग के बिना भी सफलता हासिल की जा सकती है। उन्होंने ग्रामीण परिवेश में रहकर यह उपलब्धि हासिल की और यह संदेश दिया कि अगर लक्ष्य स्पष्ट हो और प्रयास निरंतर हो, तो कोई भी बाधा रास्ता नहीं रोक सकती।

युवाओं के लिए प्रेरणा

आज भलीसर गांव में जश्न का माहौल है, लेकिन दिनेश की नजरें अब आगे की जिम्मेदारियों पर हैं। उनका सपना केवल प्रशासनिक अधिकारी बनना नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मक बदलाव लाना है। उनकी यह सफलता उन हजारों युवाओं के लिए उम्मीद की किरण है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखने का साहस रखते हैं।

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Published on:
19 Apr 2026 05:30 pm
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