
नमिता मेहता। फोटो पत्रिका
चित्तौड़गढ़। मंजिलें उन्हीं को मिलती हैं, जिनके सपनों में जान होती है, पंखों से कुछ नहीं होता, हौसलों से उड़ान होती है…। इन पंक्तियों को चरितार्थ किया है डूंगला कस्बे की होनहार बेटी नमिता मेहता ने। राजस्थान लोक सेवा आयोग की ओर से जारी आरएएस-2024 के अंतिम परिणामों में नमिता ने प्रदेशभर में 198वीं रैंक हासिल कर चित्तौड़गढ़ जिले का गौरव बढ़ाया है। नमिता की इस उपलब्धि ने न केवल उनके परिवार को खुशियों से भर दिया है, बल्कि वे कस्बे की पहली महिला आरएएस अधिकारी बनकर मिसाल पेश की है।
नमिता की यह राह फूलों की सेज नहीं थी। वर्ष 2022 में जब उन्होंने पहली बार प्रशासनिक सेवा की परीक्षा दी, तो असफलता हाथ लगी। उस वक्त मन में निराशा के बादल छाए, लेकिन पिता के भरोसे और माता के ढांढस ने नमिता को टूटने नहीं दिया। अपनी कमियों को डायरी में दर्ज किया, तैयारी की रणनीति बदली और दिन-रात एक कर दिया। शनिवार को जब परिणाम जारी हुआ, तो नमिता की आंखों में खुशी के आंसू थे और जुबां पर ईश्वर का धन्यवाद।
नमिता के पिता नरेंद्र मेहता कस्बे में एक छोटी सी किराना दुकान चलाते हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने अपनी बेटी की पढ़ाई में कभी कोई कमी नहीं आने दी। मां ललिता देवी गृहिणी हैं, जिन्होंने नमिता के संघर्ष के हर मोड़ पर उसका साथ दिया। भाई निखिल, जो स्वयं सीए की तैयारी कर रहे हैं, नमिता के लिए सबसे बड़े संबल बने।
पत्रिका से विशेष बातचीत में नमिता ने कहा, अक्सर युवा पहले प्रयास में असफल होकर तैयारी छोड़ देते हैं, जबकि प्रशासनिक सेवा की पहली शर्त ही धैर्य है। मैंने अपनी हार को स्वीकार किया और उसे जीत की नींव बनाया। युवाओं को चाहिए कि वे सपने बड़े देखें और उन्हें पूरा करने के लिए खुद को झोंक दें।
जैसे ही नमिता के आरएएस बनने की खबर मोबाइल स्क्रीन पर चमकी, डूंगला कस्बे में जश्न का माहौल हो गया। ढोल-नगाड़ों के साथ मिठाई बांटने का दौर शुरू हुआ। मेहता के निवास पर बधाई देने वालों का ऐसा तांता लगा कि घर छोटा पड़ गया। ग्रामीणों का कहना है कि नमिता ने साबित कर दिया कि प्रतिभा किसी बड़े शहर या महंगे संसाधनों की मोहताज नहीं होती।
Updated on:
19 Apr 2026, 10:01 PM IST
Published on:
19 Apr 2026, 3:45 PM IST
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