बाड़मेर

पटाखों में भरा महंगाई का बारूद : पिछले साल जिस दाम पर बेचे थे पटाखे, इस दिवाली उस रेट पर खुद खरीदकर लाए है व्यापारी

-आईटम में कमी: थोक विक्रेताओं को नहीं मिला ऑर्डर के अनुसार माल-राजस्थान में केवल एक पटाखा फैक्ट्री, यहां बनती है केवल फूलझड़ी

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पटाखों में भरा महंगाई का बारूद : पिछले साल जिस दाम पर बेचे थे पटाखे, इस दिवाली उस रेट पर खुद खरीदकर लाए है व्यापारी

पटाखों की गूंज इस बार कम सुनाई देगी, इसका कारण है कि पटाखे काफी महंगे हो गए है। पिछले साल की तुलना में करीब 40 फीसदी से अधिक दाम हो चुके है। कई आईटम जो प्रचलन में है, शायद इस बार बिक्री के लिए उपलब्ध भी नहीं होंगे। ऐसा होलसेल व्यापारियों का कहना है। व्यापारी बताते हैं कि जितना ऑर्डर इस बार दिया था, उसके मुकाबले में तो उन्हें मात्र 50-60 फीसदी माल की डिलीवरी हुई है। जिसमें कई वैरायटी आई ही नहीं। जो सबसे ज्यादा प्रचलन में थी, वह भी कम आई। इसके कारण दाम और बढ़ गए।
पटाखों की वैरायटी में आई कमी
पटाखों की वैरायटी में काफी कमी आई है। थोक व्यापारियों ने गत जनवरी में पटाखे बनाने के लिए ऑर्डर दिया था। लेकिन जब डिलीवरी मिली तो ऑर्डर का केवल 60 प्रतिशत माल ही मिला। पटाखे बनाने वाली कंपनी ने माल कम बनना बताते हुए डिलीवरी भेज दी। साथ ही ऑर्डर के अनुसार दी गई वैरायटी में कमी कर दी गई।
दशहरा के बाद पटाखों का होता था शोर, इस बार खामोश
दिवाली से 20 दिन पहले दशहरे से पटाखों की गूंज गली-मोहल्लों में शुरू हो जाती थी। शाम से लेकर देर रात तक पटाखों की आवाज आती रहती थी। लेकिन इस बार पटाखों की गूंज बहुत ही कम सुनाई दे रही है। बच्चे जरूर छोटे बम और टिकड़ी छोड़ रहे है। लेकिन बड़े पटाखों के धमाके सुनाई ही नहीं दे रहे है। इसका कारण पटाखों का महंगा होना है।
राजस्थान में बनती है केवल फूलझड़ी
प्रदेश में केवल एक पटाखा फैक्ट्री है। जहां पर केवल फूलझड़ी का निर्माण होता है। केवल एकमात्र आईटम राजस्थान में पटाखा व्यापारियों को मिलता है। इसके अलावा अन्य सभी पटाखे शिवाकाशी की फैक्ट्रियों से आत है। जहां पर जनवरी में एडवांस राशि जमा करवाने के बाद अगस्त-सितम्बर में डिलीवरी मिलती है।
ऑर्डर से कम मिला माल
हमने जनवरी में आइटम के अनुसार माल बनाने का फैक्ट्री को ऑर्डर दिया था। लेकिन डिलीवरी के वक्त केवल 60 फीसदी माल ही पहुंचा। पहले पैसा देने के बावजूद माल में कमी कर दी गई। पटाखों के दामों में इस बार करीब 40 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। मांग अधिक है और पटाखों की सप्लाई कम होने से भी दाम बढ़े है।
सन्नी शारदा, होलसेल पटाखा व्यापारी बाड़मेर
दो आईटम से समझे कितने महंगे पटाखे
-होलसेल व्यापारी का कहना है कि पटाखों की कीमत काफी बढ़ी है। लाल पेपर वाले छोटे बम की कीमत पिछले साल तक 4 रुपए प्रति पैकेट होती थी, जो इस बार होलसेल में 14 रुपए तक पहुंच गई है।रिटेल में जाने पर इसकी कीमत और बढ़ जाएगी।
-डबल स्काई शॉट के एक पटाखे की कीमत रिटेल में करीब 2 हजार रुपए है। इस साल इसकी कीमत में करीब दोगुने से अधिक की बढ़ोतरी हुई है। जब एक पटाखा दो हजार का मिलेगा तो अन्य पटाखों की कीमत का अंदाजा लगाया जा सकता है।
पटाखे महंगे होने के कारण
-शिवाकाशी में पटाखा फैक्ट्रियों को नहीं मिला पर्याप्त कागज
-पटाखा निर्माण में काम आने वाले केमिकल के दाम बढ़े
-आपूर्ति कम और मार्केट में पटाखों की डिमांड है ज्यादा
-पटाखों के ट्रांसपोर्ट से तमिलनाडू से राजस्थान तक लाना
-पटाखों पर भी लग रही है 28 प्रतिशत जीएसटी

Published on:
21 Oct 2022 09:58 pm
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