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Ravindra Singh Bhati: श्रमिकों की बहाली की मांग को लेकर विधायक रविंद्र सिंह भाटी का आंदोलन तेज, बोले: स्थानीय युवाओं को रोजगार नहीं मिला तो आंदोलन होगा बड़ा

विधायक रविंद्र सिंह भाटी का गिरल लिग्नाइट माइंस में श्रमिकों और ग्रामीणों के समर्थन में लगातार धरना जारी है। इस दौरान उन्होंने लगातार चौथी रात भी धरनास्थल पर किसानों और मजदूरों के साथ गुजारी। ग्रामीणों का आंदोलन पिछले 30 दिनों से जारी है। धरनास्थल पर बड़ी संख्या में स्थानीय लोग मौजूद रहे और कंपनी प्रबंधन के खिलाफ नारेबाजी की गई।

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विधायक रविंद्र सिंह भाटी का गिरल लिग्नाइट माइंस में श्रमिकों और ग्रामीणों के समर्थन में लगातार धरना जारी है। इस दौरान उन्होंने लगातार चौथी रात भी धरनास्थल पर किसानों और मजदूरों के साथ गुजारी। ग्रामीणों का आंदोलन पिछले 30 दिनों से जारी है। धरनास्थल पर बड़ी संख्या में स्थानीय लोग मौजूद रहे और कंपनी प्रबंधन के खिलाफ नारेबाजी की गई।

स्थानीय युवाओं को रोजगार नहीं मिलने पर नाराजगी

विधायक भाटी ने कहा कि गिरल माइंस में स्थानीय मजदूरों और ड्राइवरों के साथ लंबे समय से अन्याय हो रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि इलाके के युवाओं को रोजगार देने के बजाय बाहर के लोगों को प्राथमिकता दी जा रही है। भाटी ने कहा कि स्थानीय लोगों के हक के लिए यह आंदोलन जारी रहेगा और जब तक मांगें पूरी नहीं होंगी, तब तक वे धरने से नहीं उठेंगे।उन्होंने कहा कि यह केवल रोजगार का मुद्दा नहीं, बल्कि क्षेत्र के युवाओं के भविष्य और सम्मान की लड़ाई है। स्थानीय लोगों की अनदेखी किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

100 से ज्यादा श्रमिकों को दोबारा काम पर लेने की मांग

धरने के दौरान विधायक भाटी ने कहा कि कंपनी ने 100 से अधिक ड्राइवरों और श्रमिकों को काम से बाहर कर दिया है। इन सभी श्रमिकों को तुरंत दोबारा बहाल किया जाना चाहिए। साथ ही उन्होंने 12-12 घंटे की ड्यूटी व्यवस्था खत्म कर केवल 8 घंटे की शिफ्ट लागू करने की मांग उठाई। आंदोलनकारियों का कहना है कि लंबे समय तक काम लेने से श्रमिकों का शोषण हो रहा है। मजदूरों को उनके कौशल के अनुसार वेतन और सभी कानूनी सुविधाएं भी नहीं मिल रही हैं। श्रमिकों ने कहा कि वे अपने अधिकारों के लिए अंतिम निर्णय तक आंदोलन जारी रखेंगे।

कंपनी पर लगाए गंभीर आरोप

विधायक भाटी ने कंपनी प्रबंधन पर पर्यावरण नियमों में गड़बड़ी के आरोप भी लगाए। उन्होंने कहा कि कंपनी ने सरकार से नीम और शीशम जैसे पेड़ लगाने के नाम पर राशि ली, लेकिन मौके पर अंग्रेजी बबूल के पेड़ लगाए गए हैं। उन्होंने प्रशासन और कंपनी प्रबंधन को चेतावनी दी कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो आंदोलन को और बड़ा किया जाएगा। धरने के तीसरे दिन राजस्थान स्टेट माइंस एंड मिनरल्स लिमिटेड का प्रतिनिधिमंडल आंदोलनकारियों से मिलने पहुंचा था। प्रतिनिधियों ने मांगों को उच्च स्तर तक पहुंचाने का भरोसा दिया था, लेकिन अब तक कोई लिखित आश्वासन नहीं मिलने से ग्रामीणों में नाराजगी बनी हुई है।

आंदोलनकारियों की ये हैं प्रमुख मांगें

आंदोलन कर रहे श्रमिकों और ग्रामीणों ने कई मांगें रखी हैं। इनमें निकाले गए श्रमिकों की दोबारा बहाली, 8 घंटे की ड्यूटी लागू करना, स्थानीय युवाओं को रोजगार में प्राथमिकता देना और उच्च कुशल श्रेणी के अनुसार वेतन देना शामिल है। इसके अलावा बोनस एक्ट 1965 के अनुसार बोनस, श्रमिकों के लिए आईडी कार्ड, वेतन स्लिप, गेट पास और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग भी की गई है। आंदोलनकारियों का कहना है कि जब तक सभी मांगों पर स्पष्ट निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक धरना जारी रहेगा।