बाड़मेर

नजर न लगे इस 90 को, 18 अरब का है ये सपना

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Do not look like this 90, 18 billion is this dream
Do not look like this 90, 18 billion is this dream

इस बार 12.5 हजार हैक्टेयर में बुवाई : लगातार बढ़ता जा रहा है जीरा का रकबा और उत्पादन
नजर न लगे इस 90 को, 18 अरब का है ये सपना

बाड़मेर . ये जो पिछले हफ्ते से तापमान नौ डिग्री पर आया है इसको कई दिन नजर न लगे। 12 लाख 50 हजार हैक्टेयर में बोया गया
जीरा इसी तापमान में पकेगा
और मौसम अनुकूल रहा तो इस बार 16 की बजाय 18 अरब किसान की जेब में होंगे। जीरा, ईसबगोल और रायड़ा के किसान को इन दिनों बेचैनी कर्ज माफी की नहीं है उनको खुशी इस 9 डिग्री तापमान की है जो उनके घर खुशियां चहकाने के सपने पाल रही है।
10 साल में 7 गुना बढ़ा उत्पादन
थार के किसानों को भी जीरे की फसल करोड़पति बना रही है। इस बार करीब 12.5 हजार हैक्टेयर में जीरे की बुवाई हुई है। इसमें करीब 18 अरब रुपए का जीरा उत्पादन होने की उम्मीद है। पिछले दस सालों के आंकड़ों पर नजर दौड़ाई जाए तो जीरे का उत्पादन सात गुना से अधिक हो गया है। इस बार यह आंकड़ा और भी बढ़ जाएगा।
ये मुद्दे भी हैं जरूरी...
कब बनेगी जीरा मंडी : बाड़मेर की जीरा मंडी को व्यापारियों को भी बेसब्री से इंतजार है। यहां पर जीरा मंडी के लिए पूरी कार्रवाई होने के बाद अब अधरझूल में है। यहां भूखंड ले चुके व्यापारियों को भी नहीं पता कि जीरा मंडी कब शुरू होगी।
पैदावार बाड़मेर में, बिक्री ऊंझा में : बाड़मेर का जीरा अभी बेचने के लिए गुजरात की ऊंझा मंडी ले जाया जाता है। नजदीकी होने के कारण यहां का जीरा व्यापारी ऊंझा में बेचते हैं। स्थानीय स्तर पर मंडी हो तो व्यापारियों को जीरा ले जाने की समस्या से मुक्ति मिलेगी, साथ ही ले जाने का खर्व बच जाएगा।
चोरी का सताता है भय : बाड़मेर से व्यापारी जीरे को ऊंजा ले जाने के दौरान भरे ट्रकों के चोरी होने की आशंका से भयभीत रहते हैं। वहीं कई बार लौटते समय व्यापारियों के साथ लूट की घटनाएं भी हो चुकी है। वहीं कई बार जीरे से भरे ट्रक भी गायब हुए थे। ऐसे में स्थानीय स्तर पर मंडी शुरू हो जाए तो व्यापारियों की परेशानियां खत्म हो जाएगी।

Published on:
19 Dec 2018 09:21 am