-रोजमर्रा की वस्तुएं होती जा रही है लगातार महंगी-रसोई का बजट हर महीने बढ़ाने की पड़ रही है जरूरत-दाल-चावल से लेकर तेल-मसाले सब कुछ महंगा-इंधन और दैनिक वस्तुओं के दाम आसमान पर
बाड़मेर. कहावत है कि आटे-दाल के भाव मालूम पडऩा, अब यह हर व्यक्ति को पता चल रहा है। बाजार में यह स्थिति हो गई है कि महीने का सामान खरीदने जाओ तो पिछले बजट के अनुसार दैनिक जरूरतें की वस्तुएं खरीदनी है तो काफी कुछ छूट जाएगी। वस्तुओं के दामों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। साथ ही इंधन के दामों में वृद्धि जारी है।
चावल-दाल को सामान्यत: सस्ता माना जाता रहा है। अब स्थिति उलट हो गई है। मध्यम वर्ग के लिए भी चावल-दाल खाना मुश्किल हो गया है। इससे नीचे के वर्ग की तो कल्पना ही की जा सकती है। चावल के भाव आसमान छूने लगे हैं। साधारण चावल की प्रति किलो कीमत 100 रुपए से अधिक हो चुकी है। वहीं दालें तो 110 रुपए प्रति किलो से आगे निकल रही हे। गरीब के लिए दाल-रोगी मानी जाती थी, लेकिन अब गरीब तो क्या मध्यम वर्ग के लिए दाल खरीदने से पहले सोचना पड़ रहा है।
बढ़ता जा रहा है रसोई का बजट
दैनिक जरूरतों में किसी भी घर में सबसे अधिक खर्च रसोई पर होता है। खाने-पीने की वस्तुओं की खपत रोजाना होती है। ऐसे में सबसे अधिक रसोई के बजट पर फोकस रहता है। महंगाई की बढ़ती मार के कारण अब रसोई का बजट हर महीने बढ़ जाता है। पिछले महीने के बजट के अनुसार लिस्ट बना ली है तो इसमें कई चीजें नहीं आती है, जबकि रसोई में पूरे माह जरूरत होती है।
तेल के दाम बढऩे पर व्यापारियों ने यह निकाला तोड़
खाने का सोयाबीन का तेल 170-185 के बीच चल रहा है। ब्रांड के अनुसार अलग-अलग हो सकता है। लेकिन सामान्यत: एक लीटर के भाव इसके आसपास ही है। ग्राहक की यह मानसिकता होती है कि 100 रुपए के भीतर कुछ आता है तो खरीद लेता है। इसी का फायदा उठाते हुए बड़े व्यापारियों ने सोयाबीन तेल की 700 एमएल की बोतल बना दी है। इसका दाम 100 रुपए के अंदर है। इसमें गफलत यह भी हुई कि पहले इस बोतल पर तेल की मात्रा तक नहीं लिखी गई। ऐसे में ग्राहक भ्रमित होते रहे कि तेल सस्ता हो गया है। एक लीटर और 700 एमएल की बोतल में ज्यादा फर्क भी नजर नहीं आता है। फिर बाद में शिकायत हुई तो तेल की पैकिंग बोतल पर 700 एमएल की मात्रा अंकित की जाने लगी।
दाम नहीं बढ़ाए तो मात्रा कर दी कम
कंपनियों ने कई वस्तुएं जिनमें नहाने और कपड़े धोने के साबुन सहित कई पैक वस्तुओं के दाम नहीं बढ़ाए, उल्टे कम और कर दिए। लेकिन इसमें ग्राहक को कोई फायदा नहीं हुआ। पहले नहाने की साबुन जो 125 ग्राम होती थी, अब उसे 100 ग्राम की पैकिंग में बेचा जा रहा है। पैकिंग पहले जैसी होती है। ध्यान से देखने ही 25 ग्राम के फर्क का पता चलता है। कुछ इसी तरह बिस्किट, टोस्ट और नमकीन आदि के पैकेट में किया जा रहा है।
बजट नहीं बढ़ा सकते, वस्तुओं में कटौती मजबूरी
आय का जरिया तो वही है। महंगाई तो लगातार बढ़ती जा रही है। घर में सबसे अध्ािक रसोई का बजट प्रभावित होता है। वहीं पर कई वस्तुओं को कम करना पड़ रहा है। क्या करें, हर महीने तो रसोई का बजट बढ़ा नहीं सकते हैं। इसलिए कुछ चीजों को को लिस्ट से हटा देते हैं। पिछले महीने की लिस्ट के अनुसार भी खरीदारी करें तो कम से कम 10-20 फीसदी बजट बढ़ जाता है।
आशा गृहिणी, बाड़मेर
दैनिक जरूरतों की वस्तुओं के भाव
वस्तु भाव
मूंग मोगर 106
दाल अरहर 112
मूंग दाल 102
मोठ मोगर 110
चावल 104
चीनी 45-50
(भाव प्रति किलो)
तेल-प्रति लीटर
सोयाबीन 170-185
सरसों 180-190
मूंगफली 200-225
(स्थान के अनुसार भावों में कुछ बदलाव संभव है)