2016 से चला आ रहा यह इंतजार पता नहीं कब खत्म होगा? मजदूर की जिंदगी सुबह कमाया शाम मस्त है लेकिन लगता है सरकार की मजबूरी मजदूर से भी ज्यादा है?
रतन दवे
टिप्पणी
सामाजिक कल्याण और जरूरतमंद की मदद की योजनाओं को लेकर बजट की कमी और पंद्रह-बीस दिन में मदद करने का दावा करने वाला सरकार का सिस्टम ऐसा कैसे विफल हो गया कि लाखों मजदूरों के आवेदन लंबित और निरस्त हो रहे है। विभागीय उच्चाधिकारी यह आदेश कर रहे है कि तीन बड़ी याजनाएं जिसमें ज्यादा प्रकरण है, उनको अभी राशि नहीं दी जाए और कम प्रकरण वालों को दे दे। विभागीय मंत्री का बयान है कि 2000 करोड़ की जरूरत है और उपकर से 600 करोड़ ही आ रहे है। यानि 1400 करोड़ रुपए का विभाग के पास बंदोबश्त नहीं होने से जरूरतमंदों की अर्जियों को ही फाइलों में बंद कर दिया है। ऑन लाइन सिस्टम, महकमे के अधिकारियों की लेटलतीफी और राज्य सरकार के पास बजट की कमी जैसे कारणों के बीच में प्रदेश के 20 लाख के करीब मजदूरों के आवेदन लंबित होना बहुत बड़ा मुद्दा है लेकिन न तो विपक्ष इसको लेकर बोल रहा है और न ही प्रदेशभर के विधायक। 2016 में शुरू हुई लोककल्याणकारी योजनाओं को पहले ऑनलाइन पोर्टल पर लेकर यह भरोसा दिया गया कि अब ऑन लाइन प्रक्रिया होने से आवेदनकर्ता को दस्तावेज जमा होते ही तुरंत भुगतान हो जाएगा। 2016 से 2018 तक लाखों आवेदन लंबित हुए तो यह बताया गया कि मजदूरों ने ही आवेदन गलत किए या फिर समय पर जवाब नहीं दिया। प्रदेश में यह पहला मौका था कि एक साथ लाखों आवेदनों को निरस्त कर दिया गया। इसके बाद फिर लंबित का आंकड़ा बढऩे लगा तो नया तथ्य जांच डाल दिया और इन आवेदनों का एक बड़ा हिस्सा जांच में जाने लगा। 2022 आते आते छह साल में यह आलम हो गया कि 20 लाख के करीब आवेदन श्रमिक कल्याण की 13 के करीब योजनाओं में निरस्त और लंबित हो गए। योजनाओं का लाभ मांगने वालों की संख्या 28 लाख के करीब रही,यानि आठ लाख को ही सहायता पहुंची। श्रमिकों ने उल्टा सवाल उठाया कि श्रमिक कल्याण की योजनाओं के लिए तो उपकर निर्धारित है तो राज्य सरकार को तो उपकर वसूल कर सीधा मजदूरों को रुपया देना है। हींग लागे न फिटकरी तो फिर किरकरी क्यों? तब विभाग के मंत्री का जवाब है कि 600 करोड़ ही उपकर से आते है और मजदूर कल्याण योजनाओं को 2000 करोड़ रुपए चाहिए। सरकार मदद करेगी तब ही यह बेड़ा पार होगा। अब विभाग ने शुभशक्ति, आवास योजना जिसमें सर्वाधिक आवेदन है उनको फिलहाल रोक दिया है, यानि लाखों को यह लाभ अभी नहीं मिलेगा। 2016 से चला आ रहा यह इंतजार पता नहीं कब खत्म होगा? मजदूर की जिंदगी सुबह कमाया शाम मस्त है लेकिन लगता है सरकार की मजबूरी मजदूर से भी ज्यादा है?