- 22 जुलाई तक था बुवाई का उचित समय - 8 लाख का लक्ष्य, 2 लाख हैक्टेयर ही बुवाई - 1950 रुपए कर दिया केन्द्र सरकार ने समर्थन मूल्य
रतन दवे
बाड़मेर. बारिश के पूरे 81 दिन मिले तो बाजरी पके। इसके लिए बारिश जुलाई के पहले हफ्ते में होना बेहतर और 22 जुलाई तक हों तो भी चल जाए लेकिन इससे ज्यादा देरी मतलब बाजरी के दिन गए। बारिश ने इस बार भी इतनी देरी कर ली है। लिहाजा अब बाजरी की बुवाई प्रभावित होगी।
सरकार ने भले ही समर्थन मूल्य बढ़ाकर भले ही इसका समर्थन किया है लेकिन इन्द्र की नाराजगी ने किसानों के बम्पर बुवाई के मूड को निराश किया है। थार एवं मारवाड़ में बाजरे को सर्वाधिक पसंद किया जाता है और मुख्य खाद्य होने से इसकी बुवाई की रुचि सर्वाधिक रहती है।
इस बार तो सरकार ने भी बाजरे का समर्थन मूल्य 1950 रुपए कर दिया है जो इसके बाजार मूल्य से भी अधिक आ गया है। इससे किसानों के लिए रुचिकर के साथ बाजरा पहलीबार फायदेमंद फसल भी माना जा रहा था। किसान इसको लेकर उत्साहित थे कि अब बाजरे की बम्पर बुवाई करेंगे।
रोगों की संभावना नगण्य और आसानी से थार के धोरों में फसल की उपज भी हो जाती है लेकिन बारिश ने किसानों की आस पर पानी फेर दिया है। बाजरे की बुवाई के लिए निर्धारित समय 22 जुलाई तक था जो निकल गया। बाजरे को पकने के लिए कम से कम 81 दिन की जरुरत रहती है। एेसे में अब बारिश होने पर बाजरा कम बोया जाएगा और इसकी जगह 60-65 दिन में पकने वाली फसलें मूंग, मोठ एवं ग्वार की बुवाई होगी।
लक्ष्य नहीं हुए हासिल-
खरीफ के इस साल के जिले का लक्ष्य 15 लाख 51 हजार हैक्टेयर का है। इसमें सर्वाधिक बाजरा 8 लाख 20 हजार हैक्टेयर में बोना है। अब तक 2 लाख 5 हजार हैक्टेयर में बाजरा बोया गया है। बारिश नहीं होने से शेष लक्ष्य अब हासिल करना भी मुश्किल हो रहा है।
समर्थन मूल्य से उत्साहित-
बजारे का समर्थन मूल्य केन्द्र सरकार ने करीब दोगुना कर दिया है। अब 1950 रुपए प्रति क्विंटल बाजरे का समर्थन मूल्य है। पिछले साल तक बाजरा 1100 रुपए प्रति क्विंटल पर तो बाजार में उपलब्ध था। बढ़े समर्थन मूल्य से किसानों ने इस बार बाजरे का क्षेत्रफल रुचि के साथ फायदा देखकर बढ़ाने का मानस बना रखा था लेकिन अब उनको निराशा हाथ लग रही है।
बाजरे की बुवाई कम होगी-
22 जुलाई तक बाजरे की बुवाई का समय था जो अब निकल गया है। अब बुवाई प्रभावित होगी। मूंग,मोठ और ग्वार ज्यादा बोए जाएंगे।- डा. प्रदीप पगारिया, कृषि वैज्ञानिक