बाड़मेर

बाड़मेर… एक साल में 1800 हार्ट अटैक पीडि़त पहुंचे अस्पताल

कॉर्डियोलॉजी की ओपीडी में प्रतिदिन करीब 150 से अधिक रोगी आ रहे है। वहीं 25-30 मरीजों की रोज ईको की जाती है। विभाग शुरू होने के साथ ही यहां पर ईको टेस्ट भी शुरू हो गया था। सुपर स्पेशियलिटी में वरिष्ठ कॉडियोलॉजिस्ट नवम्बर 2022 से यहां मरीजों का सेवाएं दे रहे हैं।

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कॉर्डियोलॉजी की ओपीडी में प्रतिदिन करीब 150 से अधिक रोगी आ रहे

बाड़मेर मेडिकल कॉलेज से सम्बद्ध राजकीय जिला अस्पताल में कैथ लैब की सुविधा के अभाव में कई हृदय रोगियों की जिंदगी की सांसें टूट जाती है। अस्पताल आने वाले सीवियर हार्ट अटैक के रोगी को तुरंत ऑपरेशन की जरूरत होती है। लेकिन अस्पताल में कैथ लैब नहीं होने से यहां से रैफर करना पड़ता है। ऐसे में कई मरीज बीच रास्ते में ही अपनी जान गंवा देते है। हृदय रोग के बढ़ते मामलों के चलते गंभीर हार्ट अटैक से पीडि़त करीब 5-7 रोगी रोजाना जिला अस्पताल पहुंचते है। जिनको रैफर करने के अलावा कॉर्डियोलॉजी विभाग के पास कोई विकल्प नहीं है।

550 केस एंजियोग्राफी के लिए रैफर

राजकीय जिला अस्पताल में साल 2023 में हार्ट अटैक के 1800 पीडि़त पहुंचे। अस्पताल के आईसीयू में केवल भर्ती करके उपचार किया जाता है। किसी मरीज का ऑपरेशन करना होता है तो उसे यहां से हायर सेंटर भेजना पड़ता है। बाड़मेर से एक साल में 550 हृदय रोगियों को एंजियोग्राफी के लिए अन्यत्र रैफर किया गया।

रोजाना होती है 25-30 ईको जांच

कॉर्डियोलॉजी की ओपीडी में प्रतिदिन करीब 150 से अधिक रोगी आ रहे है। वहीं 25-30 मरीजों की रोज ईको की जाती है। विभाग शुरू होने के साथ ही यहां पर ईको टेस्ट भी शुरू हो गया था। सुपर स्पेशियलिटी में वरिष्ठ कॉडियोलॉजिस्ट नवम्बर 2022 से यहां मरीजों का सेवाएं दे रहे हैं।

बढ़ रहे हैं हृदय रोग के मामले

अस्पताल की ओपीडी से ही अंदाजा लगाया जा सकता है हृदय रोगियों की संख्या काफी तेजी से बढ़ रही है। जनरल मेडिसिन की तरह कॉर्डियो की ओपीडी में रोगियों की कतारें लगी रहती है। कई बार तो कॉर्डियो की ओपीडी 250 के पार तक चली जाती है। विशेषज्ञ बताते है कि युवाओं में भी हृदय रोग के बढ़ते मामले चिंताजनक है।

मजबूरी में करना पड़ता है रैफर

हार्ट अटैक के इमरजेंसी मामलों में तुरंत एंजियोग्राफी करने की जरूरत होती है। कैथ लैब होने पर ही यह संभव हो सकता है। अत्यंत गंभीर मामले आते है तो उन्हें रैफर ही करना मजबूरी है। कैथ लैब बनने पर रोगियों को यहीं पर संपूर्ण उपचार मिल सकता है।

-डॉ. बालाराम चौधरी, वरिष्ठ कॉर्डियोलॉजिस्ट राजकीय मेडिकल कॉलेज सम्बद्ध जिला अस्पताल बाड़मेर

Published on:
30 Jan 2024 07:29 pm
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