बाड़मेर

Rajasthan: शौक पूरे करने के लिए 12वीं पास करते ही चुराने लगा वाहन, फिर ऐसे बना ड्रग तस्कर

Rajasthan MD Drug Mastermind: जांच में सामने आया कि रमेश जनवरी के पहले सप्ताह में कोलकाता से पुणे गया और दूसरे सप्ताह वापस कोलकाता लौटा। इसी इनपुट पर टीम कोलकाता पहुंची और आरोपी को धर दबोचा।

4 min read
Jan 17, 2026
पुलिस की गिरफ्त में आरोपी। फोटो: पत्रिका

बाड़मेर। एटीएस और एएनटीएफ की संयुक्त विशेष टीम ने अंतरराज्यीय स्तर पर बड़ी कार्रवाई करते हुए पांच राज्यों में वांटेड और एक लाख रुपए के इनामी एमडी ड्रग्स तस्कर को पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता से गिरफ्तार किया है। आरोपी लंबे समय से एमडी ड्रग्स की तस्करी का संगठित नेटवर्क चला रहा था। गिरफ्तारी के बाद उससे जुड़े गिरोह, फैक्ट्रियों और सप्लाई चेन को लेकर गहन पूछताछ की जा रही है।

एटीएस महानिदेशक विकास कुमार ने बताया कि एटीएस और एएनटीएफ को पुख्ता सूचना मिली थी कि कुख्यात तस्कर रमेश कुमार उर्फ अनिल उर्फ रामलाल पुत्र सोहनलाल, निवासी शिव मंदिर के पास, नेड़ी नाड़ी, धोरीमन्ना (बाड़मेर) राजस्थान छोड़कर कोलकाता में नशे का कारोबार दोबारा खड़ा करने की फिराक में है। इसके बाद टीम ने हवाई यात्राओं से जुड़े रिकॉर्ड की गहन पड़ताल शुरू की।

ये भी पढ़ें

एमडी ड्रग का मास्टरमाइंड गिरफ्तार, 5 राज्यों में फैला था कारोबार, 36 मुकदमे दर्ज

जांच में सामने आया कि रमेश जनवरी के पहले सप्ताह में कोलकाता से पुणे गया और दूसरे सप्ताह वापस कोलकाता लौटा। इसी इनपुट पर टीम कोलकाता पहुंची और लगातार निगरानी के बाद आरोपी को धर दबोचा। पुलिस के अनुसार रमेश बाड़मेर के सेड़वा, जोधपुर के कुड़ी भगतासनी और सिरोही में पकड़ी गई एमडी ड्रग्स फैक्ट्रियों का मुख्य सूत्रधार है, जिनका संचालन उसका गिरोह करता था।

रिश्तेदारों की दुकान से मिला सुराग

शातिर रमेश न तो किसी के सीधे संपर्क में रहता था और न ही मोबाइल फोन का इस्तेमाल करता था, जिससे उसकी लोकेशन ट्रेस करना एजेंसियों के लिए चुनौती बना हुआ था। जांच में सामने आया कि उसके रिश्तेदारों की हावड़ा और कोलकाता में स्टीम की दो दुकानें हैं, जहां उसका नियमित आना-जाना था। इसके बाद एएनटीएफ की टीम ने हावड़ा स्थित जगदम्बा स्टीम दुकान को निगरानी में लिया।

किराए पर कमरा लेकर मजदूरी, फिर खुला राज

टीम ने दुकान के पास किराए का कमरा लिया और खुद को राजस्थान से काम की तलाश में आया मजदूर बताकर वहां काम करने वाले युवकों से घुल-मिल गई। बातचीत के दौरान एक वर्कर से जानकारी मिली कि रमेश धार्मिक प्रवृत्ति का है और लगातार तीर्थ यात्राएं कर रहा है। गंगासागर जाने की योजना और ट्रैवल एजेंट का नाम भी इसी दौरान सामने आया।

ट्रैवल एजेंट से कड़ी जुड़ी

एएनटीएफ टीम गंगासागर यात्रा की इच्छुक बनकर ट्रैवल एजेंट के संपर्क में आई और उसे काबू में लिया। पूछताछ में एजेंट ने बताया कि रमेश का सड़क मार्ग से गंगासागर जाने का टिकट बुक है। यह भी खुलासा हुआ कि एजेंट की पत्नी रमेश के घर खाना बनाने जाती थी। इसी अहम सूचना के आधार पर हावड़ा पुलिस की मदद से रमेश को उसके ठिकाने से गिरफ्तार कर लिया गया।

केमिस्ट्री टीचर बनकर बनाया भरोसा

रमेश ने कोलकाता में खुद को केमिस्ट्री का शिक्षक और हाल में केमिकल्स का कारोबारी बताकर छुपा रखा था। वह केमिकल फैक्ट्री लगाने के लिए जगह तलाशने की बातें करता था, जिससे अपार्टमेंट के लोग उसे प्रतिष्ठित व्यापारी समझते थे। पुलिस और एजेंसियों से बचने के लिए वह लंबे समय से राज्य के बाहर फरारी काट रहा था। गिरफ्तारी से बचने और कथित प्रायश्चित के नाम पर रमेश ने फरारी के दौरान देश के सभी 12 ज्योतिर्लिंगों और चारों धामों की यात्रा कर ली। पकड़े जाने से कुछ दिन पहले ही वह जगन्नाथपुरी से लौटकर आया था।

एक लाख की लागत, 30 लाख की एमडी

रमेश महाराष्ट्र से एमडी तैयार करने का सस्ता और नया फॉर्मूला सीखकर आया था। ब्रोमो, कास्टिक सोडा, हाइड्रोक्लोरिक एसिड, टरपीन और एथिल अल्कोहल के मिश्रण से 5 से 7 दिन में एमडी तैयार की जाती थी। एक किलो एमडी बनाने में करीब एक लाख रुपए खर्च आता था, जिसकी बाजार कीमत लगभग 30 लाख रुपए तक होती थी।

महाराष्ट्र जेल से जुड़ा ड्रग्स नेटवर्क

महाराष्ट्र की जेल में कुख्यात सरगना डॉ. बिरजू के संपर्क में आने के बाद रमेश ने एमडी ड्रग्स का अवैध कारोबार शुरू किया। पहले वह महाराष्ट्र में एमडी बनाकर राजस्थान में सप्लाई करता था, लेकिन अधिक मुनाफे के लिए उसने खुद फैक्ट्रियां स्थापित कर लीं। सहयोगियों की जमीन और मकानों में फैक्ट्री लगवाई जाती थी। केमिकल एक्सपर्ट और कच्चा माल मुंबई-पुणे और गुजरात से मंगाया जाता था।

नाम बदलकर अपराध, लंबा आपराधिक इतिहास

पुलिस से बचने के लिए रमेश अलग-अलग नामों से कारोबार करता रहा। कहीं वह रमेश, कहीं रामलाल तो कहीं अनिल बन जाता था। वह एमडी कारोबार के साथ-साथ वाहन चोरी, शराब तस्करी, मारपीट, लूट और फिरौती के लिए अपहरण जैसे गंभीर अपराधों में भी संलिप्त रहा है। 12वीं पास करने के बाद शौक पूरे करने के लिए शुरू की गई वाहन चोरी आगे चलकर रमेश का पेशा बन गई। सैकड़ों वाहन चोरी कर तस्करों को बेचे, फिर शराब तस्करी और अंततः एमडी ड्रग्स के अवैध कारोबार का बड़ा खिलाड़ी बन गया।

बिश्नाराम का करीबी, फिर खुद बना सरगना

रमेश ने अपराध की शुरुआत वाहन चोरी से की थी। वह भंवरी देवी कांड के सूत्रधार बिश्नाराम के संपर्क में आया और चोरी की गाड़ियां, अवैध शराब और नशे के कारोबार में सप्लाई करता रहा। बाद में उसने अपना अलग गिरोह खड़ा कर खुद सरगना की भूमिका संभाल ली।

31 साल की उम्र में करीब 36 मुकदमे

महज 31 वर्ष की उम्र में रमेश पर करीब तीन दर्जन आपराधिक प्रकरण दर्ज हैं। आरोपी ने पूछताछ में स्वीकार किया कि राजस्थान में 15 से 17, गुजरात में 8, तेलंगाना में 3, महाराष्ट्र में 2 और कर्नाटक में 1 मामला दर्ज है। इन सभी मामलों का सत्यापन किया जा रहा है। वह पिछले आठ वर्षों से ड्रग्स के अवैध कारोबार में सक्रिय रहा है।

ये भी पढ़ें

Mohan Lal Mittal: दुनियाभर में मशहूर राजस्थान के बिजनेसमैन मोहन लाल मित्तल का निधन, दौड़ी शोक की लहर

Also Read
View All

अगली खबर