
बाड़मेर . इनको कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा था। कभी पत्तों को छू रहे थे तो कभी पौधे को। इन्हें नहीं पता था कि पौधा कौनसी प्रजाति का है। यह कैसा दिखता है और पेड़ बनेगा तो कैसा होगा लेकिन इनको यह अहसास है जब वे पेड़ की छांव तले जाते है तो शीतल बयार छूने से अच्छा लगता है।
जब हवा नहीं आती तो इनको बेचैनी होती है और सुना है कि पेड़ से हवा आती है। जिन फल को खाते है वे पेड़ों पर ही लगते है। कल्पना कीजिए कि यही लोग जब पौधा बनाने और उसको पेड़ बनाने का संकल्प लें तो अहसासों में आंखें नम होना तय है।
देखने वालों की आंखें भले ही नम हो रही थी इनकी आंखों में एक चमक थी। अवसर था बाड़मेर शहर के पास सोमाणियों की ढाणी में पौधरोपण का। यहां सत्य सांई मूक बघिर विद्यालय में 101 पौधे रोपित किए गए। यहां अध्ययन कर रहे दृष्टिबाधित एक द र्जन से ज्यादा विद्यार्थियों ने संकल्प लिया कि वे इनकी सार संभाल करेंगे और इनको पेड़ बनाएंगे।
राजस्थान पत्रिका के हरियाळो राजस्थान अभियान के तहत यह आयोजन किया गया। विद्यार्थी जोगाराम ने कहा कि पेड़ों के बारे में वे सबकुछ जानते है,बस उन्हें देख ही तो नहीं पाते।
अहसास है और उन्हें अच्छा लगेगा कि वे अपना एक पेड़ तैयार करेंगे। खान एवं भू विज्ञान विभाग की ओर से 101 पौधे उपलब्ध करवाए गए। कार्यक्रम में खनि अभियंता गोरधनराम, राजीव कश्यप, ललित किशोर, कार्यक्रम समन्वयक अनिल शर्मा मौजूद रहे।
धोलानाडा. मंगले की बेरी के राउमावि में बुधवार को पौधरोपण कार्यक्रम बुधवार को गोपाल सिंह चौधरी व राजनाथ के मुख्य आतिथ्य, सरपंच खीयाराम बेनीवाल के विशिष्ट आतिथ्य , प्रधनाचार्य वालाराम नेहरा धोलानाडा के आतिथ्य में हुआ। प्रधानाचार्य चौधरी ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण पर ध्यान देना चाहिए। व्याख्याता दीपक कुमार, मोहरसिंह आदि उपस्थित थे।
शिव .राउप्रावि कोटडि़यों की ढाणी भिंयाड़ में बुधवार को पौधरोपण किया गया।
डिस्काम के कनिष्ठ अभियन्ता मखनलाल मीणा, प्रधानाध्यापक पदमाराम, ग्रामीण तनेराजसिंह, मनोहरसिंह, गणपतसिंह, प्रकाशसिंह उपस्थित रहे। अतिथियों ने कहा कि शिक्षा के साथ सहशैक्षणिक गतिविधियों का भी आयोजन होना चाहिए,जिसमें पौधरोपण जैसे कार्यक्रम शामिल हैं।