बाड़मेर

कोरोना: आयुर्वेद औषध की डोज, इम्युनिटी बढ़ाने पर फोकस

-अस्पताल में भर्ती मरीजों को दे रहे गिलोय वटी व अश्वगंधा चूर्ण-सुबह और शाम दोनों समय दिया जा रहा आयुर्वेदिक काढ़ा-रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए दी जा रही दवाइयां-आयुर्वेद विभाग की टीम कोविड वार्डों में दे रही सेवाएं

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कोरोना: आयुर्वेद औषध की डोज, इम्युनिटी बढ़ाने पर फोकस

बाड़मेर. जिला अस्पताल व कोविड केयर सेंटर में भर्ती कोरोना संक्रमितों को आयुर्वेद औषध की डोज भी दी जा रही है। नियमित रूप से सुबह व शाम मरीजों को विभाग की टीम अलग-अलग वार्ड में पहुंचकर दवाइयां दे रही है। जिससे मरीज की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़े और वह जल्दी से स्वस्थ हो सके।
अस्पताल में भर्ती मरीजों के एलापैथी की दवाएं तो चल ही रही है। लेकिन इसमें आयुर्वेद भी अपनी पूरी भूमिका निभा रहा है। मरीजों को नियमित रूप से काढ़ा भी दिया जा रहा है। साथ ही दवा और चूर्ण की डोज भी मिलती है। जिससे उनका श्वसन तंत्र ठीक तरह से काम कर सके और उनकी रोग प्रतिरोधकता भी बढ़े।
20 अप्रेल से दी जा रही है आयुर्वेद दवाइयां
जिला अस्पताल और कोविड केयर सेंटर में भर्ती संक्रमितों को पिछले 20 अप्रेल से दवाइयां और काढ़ा दिया जा रहा है। इसमें प्रत्येक संक्रमित को गिलोय वटी की 2-2 गोलियां 3 ग्राम अश्वगंधा चूर्ण व आयुर्वेदिक काढ़ा पिलाया जाता है। काढ़ा सुबह और शाम दोनों समय संक्रमितों के साथ परिजनों को भी पिलाया जा रहा है, जिससे उनमें भी संक्रमण के कोई लक्षण हो तो वह खत्म हो जाए। काढ़ा वितरण टीम में वरिष्ठ आयुर्वेदिक चिकित्साधिकारी डॉ. शालिनी शर्मा के अलावा आयुर्वेद कम्पाउंडर नरेश, अनिल व बीरबल शामिल हैं। जो कोविड वार्ड में जाकर संक्रमितों को दवा की डोज के साथ काढ़ा पिला रहे हैं।
यह मिलता है फायदा
आयुर्वेदिक काढ़े से गले की खराश और दर्द में राहत मिलती है है। इसके साथ ही गिलोय वटी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाती है। वहीं अश्वगंधा चूर्ण भी शरीर के लिए काफी अच्छा रहता है और इन दवाओं का सबसे बड़ा फायदा यह होता है कि रेस्पीरेटरी सिस्टम को दुरुस्त करती है। जो कोविड में सबसे अधिक प्रभावित होती है।
प्रतिदिन पिला रहे हैं काढ़ा
हमारी टीम प्रतिदिन सभी वार्ड में संक्रमितों को भी काढ़े पिलाने के साथ गिलोय वटी और अश्वगंधा चूर्ण का वितरण करती है। गत 20 अप्रेल से अब तक करीब 25 हजार कप काढ़ा वितरित करते हुए संक्रमितों को पिला चुके हैं। काढ़ा अस्पताल परिसर में ही बनाया जाता है।
डॉ. शालिनी शर्मा, वरिष्ठ आयुर्वेद चिकित्साधिकारी राजकीय चिकित्सालय बाड़मेर

Published on:
27 May 2021 09:02 pm
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