हटाया था श्रमिक को
बाड़मेर
जनता जल योजना के तहत कार्यरत एक श्रमिक को हटाना ग्राम पंचायत व जलदाय विभाग को महंगा पड़ा। प्रार्थी ने औद्योगिक विवाद अधिकरण एवं श्रम न्यायालय जोधपुर में प्रकरण दर्ज करवाया, जिस पर फैसला सुनाते हुए न्यायाधीश ने निर्णय को अनुचित बताते हुए यह एक लाख रुपए देने के आदेश दिए। जलदाय श्रमिक कल्याण संघ के जिला महामंत्री कृष्णगोपाल अरोड़ा ने बताया कि प्रार्थी भैराराम सियोलों की बेरी ने वाद पेश कर बताया कि उसे जनता जल योजना से 2002 में हटा दिया। इस पर उसने अधिशासी अभियंता पीएचईडी राइजेप खण्ड, अभियंता गुड़ामालानी, विकास अधिकारी सिणधरी, सरपंच बांड के खिलाफ न्यायालय में वाद पेश किया। इस पर न्यायाधीश अजयकुमार शर्मा ने निर्णय देते हुए मजदूरी अवधि 13 अप्रेल 2000 से 12 अप्रेल 2002 तक का भुगतान नहीं करने व 30 अप्रेल 2002 को सेवामुक्त करने को अनुचित मानते हुए मानदेय व एक मुश्त राशि एक लाख रुपए देने के आदेश जारी किए।
एक लाख रुपए व बकाया वेतन देने के आदेश
औद्योगिक विवाद अधिकरण एवं श्रम न्यायालय जोधपुर के पीठासीन अधिकारी आरएचजेएस अजयकुमार शर्मा ने एक मामले में चार जनों को सेवा से पृथक करने के निर्णय को गलत मानते हुए एक लाख रुपए व बकाया वेतन देने की घोषणा की। पक्षकार महामंत्री कृष्णगोपाल आरोड़ा जलदाय श्रमिक कल्याण संघ बाड़मेर बनाम अधिशासी अभियंता सार्वजनिक निर्माण विभाग खण्ड बाड़मेर व द्वारकादास डोसी वगैराह के मामले में निर्णय देते हुए सांवलसिंह, हनुमानराम, खुमाणङ्क्षसह, भारुराम को 16 व 31 मार्च 03 को मौखिक रूप से सेवा पृथक करने को अनुचित माना। आदेश के अनुसार चारों को एक-एक लाख रुपए क्षतिपूर्ति राशि अप्रार्थी द्वारकादास डोसी से प्राप्त करने के आदेश दिए। साथ ही बकाया वेतन देने के आदेश दिए।
फैसलों का महत्व- इस फैसलों का महत्व इसलिए भी अधिक है कि नियोक्ता बिना बताए ही श्रमिकों को सेवामुक्त कर देते हैं। इसकी जानकारी श्रमिकों को नहीं होने पर वे बेरोजगार होने के बावजूद इसकी शिकायत नहीं करते। संगठन एेसे मामलों की पैरवी करता है, जिससे की मजदूर वर्ग के हितों की उपेक्षा नहीं हो। आगे भी एेसे ही प्रयास जारी रहेंगे।- कृष्णगोपाल अरोड़ा, जिला महामंत्री जलदाय मजदूर श्रमिक संघ