- महात्मागांधी अंग्रेजी माध्यम स्कू ल खुलने पर सात बालिका विद्यालय बंद - पहले से ही बालिका विद्यालयों का टोटा, अब और स्कू लें बंद
बाड़मेर. महात्मागांधी अंग्रेजी मीडियम स्कू ल खुलने से भले ही गांवों में अंग्रेजी मीडियम का बोलबाला हो रहा है लेकिन इसकी कीमत बालिका विद्यालयों पर ताले के रूप में चुकानी पड़ रही है। जिले के सात बालिका विद्यालयों को अंग्रेजी माध्यम स्कू ल में बदला गया जिस पर इनमें अध्ययनरत बालिकाओं की शिक्षा पर ग्रहण लग गया। कई बालिकाएं सामान्य स्कू ल में भर्ती हुई तो कई ने स्कू ल छोडऩा ही उचित समझा।
बावजूद इसके किसी ने भी बालिका स्कू ल की जगह अंग्रेजी माध्यम स्कू ल खोलने पर आपत्ति नहीं की।
प्रदेश में पहले प्रत्येक जिला मुख्यालय पर एक-एक महात्मागांधी अंग्रेजी मीडियम सीसै स्कू ल खोलने का निर्णय किया। इसके बाद १६७ ब्लॉक मुख्यालय पर अंग्रेजी माध्यम स्कू ल खोले गए। वहीं, हाल ही में सरकार ने हर पांच हजार की आबादी वाले गांव में अंग्रेजी माध्यम स्कू ल खोलने का निर्णय किया। इस निर्णय की मार जिले में बालिका शिक्षा को भुगतनी पड़ रही है। क्योंकि जिले के १३ ब्लॉक में से ७ ब्लॉक पर अंग्रेजी माध्यम स्कू ल बालिका विद्यालयों को बंद कर खोले गए हैं।
यहां बालिका विद्यालय बंद, खुले अंगे्रजी मीडियम स्कू ल- जिले में बाड़मेर, बायतु, कल्याणपुर, पाटोदी, गिड़ा, समदड़ी, शिव, सिणधरी, गुड़ामालानी, धोरीमन्ना, धनाऊ, सेड़वा व रामसर में महात्मागांधी अंग्रेजी माध्यम स्कू ल खोले गए हैं। इसमें से धोरीमन्ना, सिणधरी, गुड़ामालानी, रामसर, धनाऊ, शिव व कल्याणपुर में बालिका विद्यालयों को बंद कर अंग्रेजी माध्यम स्कू ल खोले गए हैं।
स्कू ल छोडऩे की मजबूरी- पूर्व में जहां बालिका विद्यालय होने से संबंधित ब्लॉक मुख्यालय ही नहीं आसपास के गांवों से भी छात्राएं वहां पढऩे आ रही थी। अब बालिका विद्यालय बंद होने से बड़ी कक्षाओं में पढऩे वाली बालिकाओं कोतो अभिभावक पढ़ाने से भी परहेज कर रहे हैं। वहीं, छोटी कक्षाओं में अन्यत्र पढऩे की मजबूरी के चलते कई बालिकाएं पढ़ाई छोडऩे को मजबूर है।
बालिका विद्यालय बंद होने प्रतिकू ल प्रभाव - बालिका विद्यालय बंद करने से बालिका शिक्षा पर प्रतिकू ल प्रभाव पड़ेगा। जिले में पूर्व में भी बालिका शिक्षा की स्थिति बेहतर नहीं है, एेसे में बालिका विद्यालय बंद होने से छात्राएं पढ़ाई छोडऩे को मजबूर होगी।- महेश दादाणाी, शिक्षाविद
उसी विद्यालय के विद्यार्थियों को प्राथमिकता- महात्मागांधी स्कू ल जिस हिंदी माध्यम के विद्यालय में शुरू हुए हैं, उसमें वहां के विद्यार्थियों को प्रवेश की सुविधा दी है। बालिका विद्यालयों में भी एेसा ही हुआ है। कोई हिंदी माध्यम में पढ़ा चाहता है तो फिर उसे पास के विद्यालय में भेजा गया है।- जेतमालसिंह राठौड़, एडीईओ माध्यमिक शिक्षा बाड़मेर