बाड़मेर

जहां संतों का विचरण, वहां धर्म जीवंत; बिना मोक्षमार्ग कोई आत्मा सिद्ध नहीं बन सकता

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banswara
राष्ट्रसंत को दी श्रद्धांजलि : ‘मुनि तरुण सागर की साधना से श्रमण संस्कृति को नई ऊंचाइयां’

बाड़मेर. स्थानीय साधना भवन में जैन आचार्य कवीन्द्रसागरसूरि ने प्रवचन मे कहा कि सिद्धचक्र की महिमा अचिंत्य है। इसे पूर्ण समझना और समझाना हमारी शक्ति के बाहर है। सिद्धचक्र की आराधना के लिए आराधकों को नौ दिन तक ध्यान लगाना चाहिए। नवपद के अंदर महत्व का पद अरिहंत पद है।

बिना मोक्षमार्ग कोई आत्मा सिद्ध नहीं बन सकता है। 26 सौ साल पूर्व महावीर स्वामी ने संघ शासन की स्थापना की, जिसकी वजह से आज हमें साधु, उपाध्याय और आचार्य बनने का लाभ मिला। दर्शन, ज्ञान, चरित्र, तप आदि का बाहुल्य मिला। जहां संतों का विचरण है वहां, धर्म जीवंत है। यानि आठ पदों का शासन का आधार अरिहंत है। एक अरिहंत को पा लें तो किसी और की कोई आवश्यकता नहीं होती।

कृष्ण की बाल लीलाओं का किया वर्णन
सेड़वा ञ्च पत्रिका . क्षेत्र के जगदम्बा मन्दिर धनाऊ में चल रही सात द्विवसीय भागवत कथा में सोमवार को छठे दिन कथा वाचक जयराम महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं का वर्णन किया। उन्होंने कृष्ण की बाल लीलाओं का सुंदर वर्णन किया। उन्होंने कंस की ओर से गोकुल में भेजे राक्षस और राक्षसियों के वध का वृतांत सुनाया।

जयराम ने कहा कि जो भी कृष्ण के हाथों मारे गए, वे पूर्व जन्म में बुरे कर्मों के कारण ऐसे बने थे। भगवान ने उन्हें मोक्ष प्रदान किया। ग्वालबालों के साथ गोकुल की गलियों में बाल कृष्ण की शरारतें, माखन चोरी, गोपियों के साथ उनका नटखटपना और माता यशोदा के साथ वार्तालाप सुन श्रद्धालु भाव विभोर हो गए। इस अवसर पर मांगीलाल जैन, बन्नाराम पोटलिया, दिनेश बोहरा, शक्तिसिंह सोलंकी सहित कई लोग मौजूद रहे।
फोटेा- एसडीसीए- सेड़वा के धनाऊ में भागवत कथा के दौरान उपस्थित श्रद्धालु।

सम्मलेन 20 को
बाड़मेर . जाटा मेघवाल समाज विकास संस्थान बलदेव नगर की ओर से 20 अक्टूबर को वार्षिक सम्मलेन व जागरण होगा। जिलाध्यक्ष महेन्द्रपाल बरवड़ ने बताया कि वार्षिक सम्मलेन में समाज की प्रतिभाओं को सम्मानित करने के साथ सामाजिक मुद्दों पर चर्चा की जाएगी।

Updated on:
17 Oct 2018 08:51 pm
Published on:
16 Oct 2018 08:01 pm