
बाड़मेर. मानसून के बादल तो खूब आसमान में दिखे लेकिन एक बार भी जमकर नहीं बरसे। अब तो पिछले दो दिनों से धूप निकल रही है। बारिश की उम्मीदों पर पानी फिरता दिख रहा है। सावन का महीना भी आधे के कारीब आ चुका है लेकिन यह भी सूखा बीत रहा है। जिले में अब तक सामान्य से 43.3 एमएम कम बरसात हुई है। बारिश की उम्मीद में किसान के दिन भी इंतजार में बीत रहे हैं।
जिले में बरसात देखा जाए तो मानसून आने से पहले एक बार ही हुई थी। मानसून के बाद देखा जाए तो केवल 39 एमएम बारिश ही हुई है। ऐसे में बरसात का इंतजार बढ़ता जा रहा है और किसान इंतजार में खेतों में है। लेकिन अब तो आसमान में बादल भी नहीं दिख रहे हैं।
सबसे पहले बाड़मेर में आया था मानसून
मानसून के आगमन के बाद कई दिनों तक यह बाड़मेर में अटका रहा। लेकिन यहां बारसा नहीं। जब यहां से आगे की तरफ बढ़ा तो फिर मुड़कर ही देख रहा है। अब तो यह स्थिति हो गई है मानसून कहीं वनवास पर तो नहीं चला गया।
जुलाई के आखिरी और अगस्त में होती है बरसात
जिले में देखा गया है कि जुलाई के आखिरी और अगस्त के शुरू होते ही अच्छी बरसात होती है। लेकिन इस बार अगस्त भी शुरू हो गया। लेकिन बारिश की उम्मीद टूटती दिख रही है। हालांकि उम्मीद अब भी है कि अगस्त महीना बाकी है, जल्द ही अच्छी बारिश हो जाए।
पड़ौसी जिले जैसलमेर में सामान्य से अधिक
बाड़मेर में जहां केवल 79 एमएम पानी ही बरसा है। वहीं जैसलमेर में अब तक 213 मिलीमीटर बारसात हो चुकी है। यह सामान्य से 121.9 एमएम अधिक है। दूसरी तरफ बाड़मेर में अब तक मानसून की मामूली बरसात ही हुई है।
बाड़मेर में 2020 में 302 एमएम बरसा था मानसून
जिले में पिछले मानसून में 302 एमएम बारिश हुई थी। बरसात का सिलसिला सितम्बर तक चला था। लेकिन सबसे अधिक बरसात बरसात अगस्त महीने में हुई थी। जिले के सेड़वा में 16 अगस्त 2020 को एक ही दिन में 100 एमएम बारिश दर्ज हुई थी। मानसून के दौरान किसी एक स्थान पर एक ही दिन में यह सबसे ज्यादा बारिश थी।