श्री का श्रीगणेश बना थार के संगीत के लिए शुभ
श्री का श्रीगणेश बना थार के संगीत के लिए शुभ
मोरिया आछो रे बोल्यो के बाद बाड़मेर का संगीत बालीवुड तक पहुंच
बाड़मेर. सात समंदर पार तक पहुंची बाड़मेर की मांगणिहार गायकी की बॉलीवुड में आज जो पहचान है उसका आधार श्रीदेवी की फिल्म का एक गाना रहा जिसकी धूम ने आज बाड़मेर के देसी गानों को फिल्मों में पहचान दी है। इसके बाद तो बाड़मेर के गानों और अब गायकी के टी वी प्रोग्राम में भी बाड़मेर जैसलमेर छाने लगे है।
1991 में बनी फिल्म लम्हे से पहले बाड़मेर-जैसलमेर के गायकी में आवोनी पधारो म्हारे देस.. ही धोरा धरती की पहचान हुआ करती थी। श्रीदेवी ने इस गाने में धोरों पर मोरिया आछो रे बोल्यो रे धरती रात ने...गीत को गाया। यह गाना इससे पहले बाड़मेर के लोक गायकी में रेडियो पर यदाकदा गूंजा करता था लेकिन बॉलीवुड में आए इस संगीत ने धूम मचा दी और इसके बाद बाड़मेर-जैसलमेर की गायकी के निकले कई गानों का जादू बिखरा है।
थूं काई बोली-
श्री के इस गाने के बाद उस समय में ईला अरूण ने अपनी एलबम दल्ली शहर में म्हारो घाघरो जी घूम्यो में भी थूं कांई बोली का इस्तेमाल करते हुए बाड़मेर-जैसलमेर की लोक गायकी को ऊंचाई दी और उस समय यह एलबम इतनी चली कि बाड़मेर मांगणिहारी गायकी को नई ऊंचाइयां मिली। इस एलबम में बाड़मेर के थारश्री इंद्रप्रकाश पुरोहित और यहां के मांगणिहार कलाकारों ने काम किया।
नींबूड़ा-नींबूड़ा भी छा गया-
बाड़मेर के देसी संगीत का जादू एेश्वर्या राय की एक फिल्म में भी खूब छाया जब उन्होंने नींबूडा-नींूबड़ा म्हानै काचा-काचा नींबू लाय द्यो गाया.. मांगणिहार गायकी से निकला यह संगीत का जादू बालीवुड में बेहद पसंद किया गया।
अब तो हर कंपीटिशन में बाड़मेर-जैसलमेर- मांगणिहार गायकी को लेकर अब तो क्रेज इस कदर है कि इंडियन आयडल के बाद एक के बाद एक आ रहे संगीत से जुड़े कार्यक्रमों में बाड़मेर के लोक गायकों के दल पहुंचते है। इनकी गायकी का जादू चल रहा है। स्वरूपखां, फकीराखां-खेताखां ग्रुप सहित कई कलाकारों ने धाक जमाई है।
श्रीदेवी के संगीत बाद काम मिलता गया-
श्रीदेवी का संगीत आने के बाद ईला अरूण ने बालीवुड में बुलाया। फिर तो एक के बाद एक कार्यक्रम आते गए। फिल्मों में सूफियाना संगीत में नयापन के लिए बाड़मेर के बोल पहुंचे तो कई गाने हिट हुए। अब तो टी वी पर भी कार्यक्रमों में मिलते है। श्रीदेवी हमारे लिए शुभ रही।
-फकीराखां, अंतरर्राष्ट्रीय लोक कलाकार
जादूई गीत था और जादू हो गया-
मोरिया आछो रे बोल्यो ढळती रात में एकदम बाड़मेर की भाषा का गाना था। बालीवुड तक तो इसका अंतरा भी नहीं समझा था लेकिन यह इतना फैमस हुआ कि हम लोगों को अचरज हुआ। फिर तो कई गानें हम जो गाते है वहां पहुंच गए।
- अनवरखां बहिया, अंतरर्राष्ट्रीय लोक कलाकार