
बाबूसिंह.
रामसर. उपखंड मुख्यालय से 12 किलोमीटर दूरसेतराऊ की पहाड़ी से सटा एक धोरा जिसकी रेत बजती है ।आपको सुनकर ताज्जुब होगा कि भला रेत कैसे बज सकती है।
लेकिन जब वहां जाकर दोनों हाथों से उस रेत के कणों को टकराया जाता है तो उसमें भौ भौ की तरह ध्वनि निकलती है ।यह सुनकर हर कोई दांतो तले अंगुली दबा देता है ।
यहां पर कई बार बाहर से टीमें भी आई ।लेकिन अभी तक किसी भू वैज्ञानिकों ने यह नहीं बताया कि यह रेत किस कारण बनती है ।आखिर इसमें ऐसा क्या है जो ध्वनि उत्पन्न करता है।
ग्रामीणों के अनुसार यहां एक शिव मंदिर को बताया जा रहा है ।यहां वह इस धोरे में दफन हो गया । ग्रामीणों में जब यह सुना तो किसी अद्वितीय शक्ति के होने के कारण आज से 13 वर्ष पहले फतेहपुरी जी महाराज डुंगरपुरी मठ चौहटन को लाया गया ओर एक जागरण करवाया गया ।
इस बजते धोरे की बात सुनकर क्षेत्र के दूर दराज के गांवों, जिलों और राज्यों के लोग यहां पर आते हैं और कट्टो में भरकर इनकी रेत को ले जाते हैं ।लेकिन इस रेत को कटे में भर के अपने साथ ले जाते हैं तो यह रेत बजना बंद हो जाती है ।
आखिर ऐसा क्या कारण है कि यहीं पर इसी धोरे की रेत बजती है। ऐसा आज दिन तक किसी को नहीं पता!
"इस धोरे की रेत बजती है। यहाँ बाहर से पर्यटक आते जाते रहते हैं ।अगर इसे पर्यटक स्थल के के रूप के विकसित किया जाए तो सरकार को आय हो सकती हैं।"
-कलाराम सेतराऊ ग्रामीण
"इस धोरे की रेत भपंग की तरह टकराने से बजती है।लेकिन अभी तक यह पता नहीं चला है कि इसके बजने का राज़ क्या है।"
-जुगता राम जयपाल ग्रामीण