- नाकोड़ा तीर्थ का अंजनशलाका महोत्सव...- दूसरे दिन हुए धार्मिक कार्यक्रम - सैकड़ों आचार्यों व संतों के आगमन पर किया स्वागत
बालोतरा.जैन श्वेताम्बर नाकोड़ा तीर्थ पर अंजनशलाका व मंदिर-प्रतिष्ठा के नौ दिवसीय महोत्सव के दूसरे दिन बुधवार को धार्मिक कार्यक्रम हुए। आचार्यों व संतों के सान्निध्य में हुए इन कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। इससे मेला जैसा माहौल नजर आया। समूचा तीर्थ विद्युत की रोशनी से जगमगा रहा है। गुरु-भंगवतों के सान्निध्य में वेदिका पूजन, वेदिका में प्रभु स्थापना, नवग्रह, दस दिक्पाल, अष्ट मंगल , लघु नन्दार्वत पूजन, 16 विद्यादेवी पूजन, भैरव पूजन, क्षेत्रपाल पूजन, नवपद पूजा के आयोजन हुए। श्रद्धालुओं ने पूजन करने के साथ ही जयकारे लगाए तथा भजन गाए। वेदिका पर अंजनशलाका की जाने वाली प्रतिमाओं को विराजित किया गया। दोपहर 12:30 बजे तीर्थ पर आचार्य देवेश, मनोहर कीर्तिसागर, गच्छाधिपति आचार्य अभयदेव, आचार्य कुंद सूरीश्वर, विमलगच्छाधिपति आचार्य प्रद्युम्न विमलसूरीश्वर महाराज, आचार्य कल्याणसागर, आचार्य रेवतसूरीश्वर, आचार्य अभयसेन, आचार्य भाग्ययश, आचार्य उदयकीर्तिसागर, आचार्य राजतिलक सागर, आचार्य विश्वरतन सागर, आचार्य कीर्तिचन्द्र सूरीश्वर, आचार्य भाग्यपूर्ण सूरीश्वर सहित करीब 200 पन्यास प्रवर व मुनियों के आगमन पर ट्रस्ट मण्डल पदाधिकारियों व श्रद्धालुओं ने गाजे-बाजे से उनका सामैया किया। प्रतिष्ठा निमित लाभार्थियों का बहुमान लाभार्थी परिवार की ओर से किया गया। शोभायात्रा के रूप से मंदिर पहुंचे। श्रद्धालुओं ने जयकारे लगाए। आचार्यों ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि गुरुजनों का सम्मान करने वाले व्यक्तियों के जीवन में कभी कष्ट नहीं आते। उनका जीवन खुशियों से भर जाता है।
दिनभर श्रद्धालुओं की रेलमपेल
नाकोड़ा तीर्थ पर दिनभर श्रद्धालुओं की आवाजाही लगी रही। आयोजन को लेकर समूचे तीर्थ पर आकर्षक रोशनी से सजावट की गई। इससे पूर्व राजेन्द्रधाम तीर्थ पर आचार्यों का ट्रस्ट कोषाध्यक्ष सायरमल नाहर, ट्रस्टी अरविन्द मदाणी पचपदरा, रतनलाल मालू, गौतम गोलेच्छा, अमरचन्द कटारिया आदि ने स्वागत किया।
आचार्यों व संतों के सान्निध्य में हुए इन कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। इससे मेला जैसा माहौल नजर आया। समूचा तीर्थ विद्युत की रोशनी से जगमगा रहा है। गुरु-भंगवतों के सान्निध्य में वेदिका पूजन, वेदिका में प्रभु स्थापना, नवग्रह, दस दिक्पाल, अष्ट मंगल, लघु नन्दार्वत पूजन, 16 विद्यादेवी पूजन, भैरव पूजन, क्षेत्रपाल पूजन, नवपद पूजा के आयोजन हुए। श्र